रामपुर। गंगापुर आवास विकास स्थित नर्मदेश्वर मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास ने लोगों को विनम्र, सदाचारी बनने और अहंकार न करने के लिए प्रेरित किया।
कथा व्यास पंडित भैया लाल शुक्ल ने कहा कि बिना अहंकार त्यागे मनुष्य ईश्वर की प्राप्ति नहीं कर सकता है। अहंकार और ईश्वर का बैर होता है। परमात्मा की प्राप्ति के लिए मनुष्य को अहंकार का त्याग करना पड़ता है।
कथा व्यास ने कहा कि रास शब्द का अर्थ है रस। गोपियों की इच्छा पूर्ण करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ रास किया। भगवान श्रीकृष्ण स्वयं रस हैं। रुक्मणी विवाह का वर्णन करते हुए व्यास ने कहा कि रुक्मणी ने श्री कृष्ण से कहा कि प्रभु मुझमें नारी सुलभ सभी गुण विद्यमान है अत: आप मंदिर में पूजन करने जाते समय मेरा हरण कर मेरा वरण करें। भगवान कृष्ण ने रुक्मणी का वरण इसी प्रकार किया। इसके बाद कथा व्यास ने महाशिवरात्रि पर्व के अवसर पर भगवान शिव का रुद्राभिषेक कराया। इस अवसर पर पीयूष कुमार, प्रवीण, राधेश्याम यादव, सीताराम शर्मा, केके सक्सेना, राकेश गुप्ता, हर्ष गुप्ता, सीताराम शर्मा, राजीव शर्मा, प्रवीण भांडा, सुभाष सक्सेना, सुनील सक्सेना, दिनेश कुमार, अंकित, राकेश, विष्णु शरण अग्रवाल, मनोज, उमेश शर्मा, रामबाबू गुप्ता, छाया, कामिनी, कांति, कविता, रवि आदि मौजूद रहे।