रामपुर। कोतवाली क्षेत्र के सिलईबड़ा गांव में बुधवार को तनावपूर्ण माहौल में भारी पुलिस बल की मौजूदगी में मृतक छात्र सुमेश का अंतिम संस्कार हुआ। घटना के बाद पीड़ित पक्ष के लोगों में भारी गुस्सा था, जिसके चलते पूरा दिन अफरातफरी का माहौल रहा। बुधवार सुबह शव पहुंचने के बाद पहले परिजनों ने शव लेने से इन्कार कर दिया। कहा कि एफआईआर में एसडीएम और तहसीलदार के नाम निकाल दिए गए। प्रशासनिक अधिकारियों के आश्वासन के बाद परिजनाें ने शव उठाया। इसके बाद प्रशासन ने एसडीएम और सीओ को हटा दिया। साथ ही इंस्पेक्टर मिलक, चौकी इंचार्ज व तीन सिपाहियों को लाइनहाजिर कर दिया। मामले में दो होमगार्ड, चार पुलिसकर्मियों समेत 25 लोगों पर रिपोर्ट दर्ज की गई है। सिलईबड़ा गांव में सरकारी जमीन पर डाॅ. भीमराव आंबेडकर पार्क का बोर्ड लगाए जाने को लेकर मंगलवार को दो पक्ष आमने-सामने आ गए थे। शाम करीब पांच बजे इस दौरान हुई फायरिंग में गोली लगने से परीक्षा देकर लौटे 10वीं के 17 वर्षीय छात्र सुमेश की मौत हो गई थी। परिजनों का आरोप है कि छात्र की मौत पुलिस की गोली लगने से हुई है। पिता गेंदनलाल ने मंगलवार देर रात तहरीर देकर एसडीएम अमन देओल व तहसीलदार राकेश चंद्रा के निर्देश पर हमराह होमगार्डों द्वारा गोली चलाने का आरोप लगाया था। जिससे ग्रामीण और पुलिस व जिला प्रशासन के बीच तनाव का माहौल रहा।
मंगलवार देर रात तक कमिश्नर आंजेन्य कुमार सिंह, डीआईजी मुनिराज जी व जिलाधिकारी जोगिंदर सिंह सहित अन्य अधिकारियों ने परिजनों को मामले में समझाने का प्रयास किया। जिसके बाद पुलिस ने मृतक छात्र के शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेजा। बुधवार सुबह करीब आठ बजे पोस्टमार्टम के बाद छात्र सुमेश का शव एंबुलेंस से गांव पहुंचा तो परिजनों ने शव लेने से इन्कार कर दिया। परिजनों ने एफआईआर कॉपी में एसडीएम व तहसीलदार के नाम निकालने पर नाराज थे।
मुकदमे में एसडीएम व तहसीलदार के हमराह होमगार्ड, चौकी इंचार्ज सहित चार पुलिसकर्मियों समेत 25 लोगों के नाम शामिल हैं। करीब दो घंटे बाद हंगामे के बाद प्रशासनिक अधिकारियों के आश्वासन पर परिजनों ने शव को उठाकर घर में रखा। शव के घर में रखने के बाद ग्रामीणों और भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने जमकर हंगामा किया। हंगामे को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए परिजनों और रिश्तेदारों के अलावा अन्य किसी को घर में नहीं आने दिया।
करीब 12 बजे जब शव को अंत्योष्टि के लिए लेकर निकले तो भीम आर्मी व ग्रामीणों का गुस्सा भड़क गया। घर की कुछ ही दूरी पर छात्र का शव सड़क पर रखकर लोग विरोध प्रदर्शन करने लगे। डीआईजी मुनिराज जी मौके पर नजरें बनाए हुए थे, जबकि जिलाधिकारी जोगिंदर सिंह व एसपी राजेश द्विवेदी सहित अन्य अधिकारी परिजनों का समझाते रहे। कुछ देर बाद मृतक छात्र के शव को उठाकर श्मशानघाट ले जाया गया। श्मशान घाट में भी परिजनों और भीम आर्मी के लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद के आने तक अंतिम संस्कार न करने की बात कार्यकर्ता कहते रहे। भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस ने श्ममान घाट में लोगों पर लाठियां फटकारी। करीब ड़ेढ घंटे बाद संभल में पुलिस द्वारा नजरबंद किए गए चंद्रशेखर आजाद ने वीडियो कॉलिंग पर पीड़ित परिजन, डीएम व एसएसपी से मामले की जानकारी ली। जिसके बाद करीब तीन बजे शव का अंतिम संस्कार किया। पिता गेंदनलाल ने बेटे की चिता को मुखाग्नि दी।
इन पर दर्ज हुआ मुकदमा
एसडीएम मिलक के हमराह होमगार्ड, तहसीलदार के हमराह होमगार्ड, सिलईबड़ा चौकी के प्रभारी सुरेंद्र सिंह, सिपाही आदेश चौहान, वीरेंद्र, मुमतीरीन के अलावा गांव के नत्थूलाल, हेमराज, निर्वेश कुमार, झांजनलाल, तीरथ सिंह, जहोरीलाल, दिनेश कुमार, नौबत राम, हरनंदन, रामप्रकाश, ऊदल, लाल सिंह, बद्री प्रसाद, चरन सिंह, रविंद्र कुमार, राजेंद्र, भूपराम, नरेंद्र, कपिल पर एससी-एसटी एक्ट सहित 147,148, 149, 323, 302 की धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ है।