परिवार का इकलौता सहारा था शावेद
शावेद अपने परिवार का मुख्य सहारा था। उसका एक भाई मानसिक रूप से पीड़ित है, ऐसे में घर की पूरी जिम्मेदारी उसी के कंधों पर थी। उसकी असमय मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। गांव के लोगों का कहना है कि शावेद मेहनती और मिलनसार युवक था, जिसने परिवार के बेहतर भविष्य के लिए विदेश का रुख किया था, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
रोजगार की तलाश में गया, आर्मी तक पहुंचा, लेकिन नहीं लौट सका जिंदा
शावेद घर की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए रूस स्टील फर्नीचर का काम करने गया था। दो महीने उसने स्टील फर्नीचर का काम किया। इस दौरान वह हॉस्टल में रहता था। बताते हैं कि हॉस्टल से आर्मी वाले उसे अपने साथ ले गए। इसके बाद उसने आर्मी जॉइन कर ली, लेकिन यह फैसला उसकी जिंदगी का आखिरी पड़ाव बन गया।