रामपुर में ब्रिटिश इंजीनियर डब्लूसी राइट द्वारा बनाई गई हामिद मंजिल। जिसमें अब रजा लाइब्रेरी चल
- फोटो : RAMPUR
रामपुर। किले के अलावा इस शहर में कई दीगर इमारतें ऐसी हैं जिन्हें देखकर कोई भी दंग रह जाएगा। देखभाल के अभाव में कइयों की हालत खराब है, लेकिन आज भी आम आदमी से लेकर बड़े-बड़े इंजीनियर तक इनकी वास्तुकला और निर्माण शैली के कायल हैं। इन इमारतों की भव्यता के पीछे जो नाम है वो ब्रिटिश इंजीनियर डब्ल्यूसी राइट हैं। इन्होंने नवाब हामिद अली खां के कार्यकाल में रामपुर रियासत में कई आलीशान इमारतें खड़ी कीं, जो सैकड़ों साल बाद भी इस रियासत की शानो शौकत बयान करती हैं।
1896 से 1930 तक रामपुर रियासत के हुक्मरान नवाब हामिद अली खां थे। उन्हें निर्माण कार्यों से इतना लगाव था कि उन्हें उस दौर का शाहजहां भी कहा गया। उन्होंने ब्रिटिश इंजीनियर डब्ल्यूसी राइट को यहां लाकर कई इमारतों का निर्माण कराया। डब्ल्यूसी राइट ब्रिटिश सरकार के नॉर्थ वेस्ट प्रोविंस के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर थे। उन्होंने 1899 में ब्रिटिश सरकार को इस्तीफा देकर रामपुर के नवाब हामिद अली खान के यहां चीफ इंजीनियर का पद स्वीकारा। इसके बाद पूरे रामपुर शहर की वास्तुकला को अलग ऊंचाई पर पहुंचाया। नवाब हामिद अली खान ने ब्रिटिश चीफ इंजीनियर डब्ल्यूसी राइट की सहायता से पूरे रामपुर किले को नया रूप दिया। इस वास्तु संबंधी परिवर्तन के तहत किला, खासबाग पैलेस, हामिद मंजिल और इमामबाड़ा भी बनवाया। किले के अंदर बना रंगमहल और मछली भवन भी राइट की वास्तुकला का उदाहरण है। राइट की निर्माण शैली को इस्लामिक, हिन्दू तथा विक्टोरियन गोथिक शैलियों का मेल जिसे इंडो सारसेनिक वास्तुकला के नाम से जाना जाता है। हामिद मंजिल के एक गुंबद को मंदिर, दूसरे को मस्जिद, तीसरे को गुरुद्वारा और चौथे को चर्च की आकृति देकर उन्होंने सांप्रदायिक सौहार्द का भी संदेश दिया था। किले के दो मुख्य द्वार बनवाए गए थे, जिसमें से पश्चिमी द्वार को आज भी राइट गेट के नाम से जाना जाता है। दुनिया भर के शासक राइट की वास्तुकला और निर्माण शैली से इस कदर प्रभावित हुए कि जब लार्ड कर्जन रामपुर आए तो वो अपने साथ यहां के भवनों के चित्रों की एक फोटो एलबम लेकर गए थे, जो आज भी ब्रिटिश म्यूजियम में संरक्षित है।
किले में लगी थी इंजीनियर राइट की मूर्ति
रामपुर। खूबसूरत इमारतों के तामीर से खुश रामपुर के नवाब ने चीफ इंजीनियर डब्ल्यूसी राइट की संगमरमर की मूर्ति किले के भीतर लगवाई थी। अब मूर्ति गायब है। इंजीनियर की मूर्ति उस समय चर्चा में आई जब इसे यहां से हटा दिया गया। आरोप-प्रत्यारोप के सालों बाद भी यह पता नहीं चल पाया है कि मूर्ति कहां गई और किसने गायब कराई थी।
क्यों मनाया जाता है इंजीनियर्स डे
भारत में प्रतिवर्ष 15 सितंबर को अभियंता दिवस (इंजीनियर्स डे) के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन देश के महान अभियंता एवं भारतरत्न मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का जन्म हुआ था। विश्वेश्वरैया भारत के महान इंजीनियरों में से एक थे, इन्होंने ही आधुनिक भारत की रचना की और भारत को नया रूप दिया. उनकी दृष्टि और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में समर्पित भारत के लिए कुछ असाधारण योगदान दिया।