गुरु के सुमिरन मात्र से ही तमाम दु:ख दूर हो जाते हैं। इसलिए अपने रब और गुरु के लिए थोड़ा समय जरूर निकालें। ये कहना है उत्तराखंड से आए कथावाचक भाई करमजीत सिंह का। वो मुल्लाखेड़ा गुरुद्वारे में रविवार को आयोजित शहीदी समागम को संबोधित कर रहे थे।
मुल्लाखेड़ा गुरुद्वारे में बाबा अजीत सिंह खालसा सेवादल की ओर से मनाए जा रहे माता गूजर कौर और उनके चारों पोते के 311वें शहीदी समागम में उन्होंने कहा कि मनुष्य आज की भागदौड़ में अपने रीति रिवाज भूलता जा रहा है, जो गलत है। गुरु का नाम लेने से ही मनुष्य के पाप स्वत: खत्म जाते हैं।
उन्होंने सबद कीर्तन के माध्यम से संगत को घंटों निहाल किया। सुबह आसा दी वार का कीर्तन हुआ। पंडाल बीच श्री गुरुगंथ साहिब की पालकी लाई गई। श्री गुरुग्रंथ साहिब की स्थापना की गई। भाई खजान सिंह के रागी जत्थे, देवेंद्र सिंह ताज और बलविंद्र कौर खालसा पंजाब के कविश्री जत्थे, भाई मेजर सिंह खालसा पंजाब के ढाढ़ी जत्थे ने कीर्तन किया।
ज्ञानी भाई करमजीत सिंह ने गुरुओं के इतिहास पर प्रकाश डाला और संगत को निहाल किया। गुरु का अटूट लंगर बरता गया। दीवान शाम चार बजे तक चला। संचालन भाई कश्मीर सिंह ने किया।
व्यवस्था में प्रधान करनैल सिंह, राजेंद्र सिंह, सुखदेव सिंह, भगवंत सिंह, जोगिंद्र सिंह, महेंद्र सिंह, गुरदीप सिंह, सरजीत सिंह, बल्देव सिंह, हरभजन सिंह, गुरदीप सिंह, बलजिंद्र सिंह, सरबन सिंह, सरदूल सिंह, दलविंद्र सिंह, बूटा सिंह, अमरजीत सिंह, नरेंद्र सिंह, अवतार सिंह आदि मुख्य थे। प्रधान करनैल सिंह ने बताया कि 21 दिसंबर को अमृत संचार होगा।