रामपुर। जिले में जलस्त्रोंतों की कमी नहीं है, इसके बाद भी रामपुर के किसानों को सिंचाई के संकट से जूझना पड़ता है। जिले में कुल 17 नदियां सिंचाई विभाग के रिकार्ड में दर्ज हैं। इनमें से तीन नदियों का अस्तित्व ही सिमट गया है तो वहीं नहरों पर अवैध कब्जे हो गए हैं। जो नहरें अस्तित्व में हैं भी उन नहरों में टेल तक पानी नहीं पहुंच पाता। इसी कारण किसानों को सिंचाई का भरपूर लाभ नहीं मिल पा रहा है।
यूं तो प्रकृति रामपुर पर खूब मेहरबान रही है, लेकिन मानवीय लालच ने प्राकृतिक स्रोतों को तहस नहस कर दिया। सिंचाई विभाग के अधिकारी बताते हैं कि रामपुर ऐसा जिला है, जहां सर्वाधिक नदियां हैं। यहां 17 नदियां बहती थीं। इन्हीं नदियों की वजह से रामपुर का सिंचाई सिस्टम भी बेहतर था। नहरों से होते हुए किसानों के खेतों तक पानी पहुंचता था। किन्तु, गुजरते दिनों के साथ रामपुर का सिंचाई सिस्टम बर्बाद होता चला गया। नदियों से लेकर नहरों तक अवैध कब्जे होने लगे। किसी ने नहर और नदी की जमीन पर मकान बना लिया तो किसी ने दुकान सजा ली। आलम यह है कि जिले की तीन नदियों का अस्तित्व ही गायब हो गया। इसके अलावा जो नदियां हैं भी, वे सिर्फ बरसाती नदियां बनकर रह गई हैं। जिले की बड़ी नदियों में शामिल कोसी, रामगंगा, भाखड़ा और पीलाखार की स्थिति बेहद चिंताजनक है। कोसी, पीलाखार और भाखड़ा नदी में तो पानी रहता है, लेकिन वह भी भरपूर नहीं। बैगुल, किछिया और बौर नदी में तो कभी कभार ही पानी नजर आता है। ऐसे में इन नदियों का अस्तित्व भी खतरे में पड़ता जा रहा है। हालांकि, सिंचाई विभाग के अफसरों की मानें तो इसकी एक वजह यह भी है कि अब पहले की तरह बरसात नहीं होती है। ऐसे में नदियां सूखती चलीं गईं, जहां किसानों ने अवैध कब्जे कर लिए और उनमें फसलें आदि बोने लगे। नतीजा यह हुआ कि किसानों के खेतों में सिंचाई का संकट खड़ा हो गया।