पीपली वन की जमीन पर अवैध रूप से काबिज ग्रामीणों पर फिर संकट मंडराया है। वन क्षेत्र में काबिज पंद्रह गांव के ग्रामीणों को तहसीलदार ने जिलाधिकारी के निर्देश पर 15 दिन के अंदर जमीनों के अभिलेख और अन्य मिलने वाली सरकारी सुविधओं के अभिलेख वन क्षेत्राधिकारी के समक्ष पेश करने के निर्देश दिए हैं।
आजादी के बाद पाकिस्तान से आए शरणार्थियों ने पीपली वन में शरण ली थी। धीरे-धीरे आबादी बढ़ती गई और वन विभाग की लगभग 2200 हेक्टयर भूमि पर 15 गांव बस गए, उन्हें सरकारी सुविधाएं जैसे बिजली, स्कूल, सड़कों के साथ ही ग्राम पंचायतों का दर्जा भी मिल गया, लेकिन आज तक ग्रामीणों को जमीन का मालिकाना हक नहीं मिल सका। जिसको लेकर वह लगातार प्रयास में लगे हैं। जबकि वन विभाग द्वारा कई बार भूमि कब्जा मुक्त कराये जाने को ग्रामीणों को नोटिस भी जारी किये गए। बाद में ग्रामीणों ने न्यायालय का सहारा लिया, जिससे मामला ठंडे बस्ते में पड़ गया।
अब जिलाधिकारी द्वारा हाईकोर्ट के निर्देश पर एक टीम गठित की गई है। जिसमें उपजिलाधिकारी स्वार को प्रभारी, तहसीलदार अशोक कुमार, वन क्षेत्राधिकारी माजिद इब्राहिम को उप प्रभारी नियुक्त कर ग्रामीणों से वार्ता कर उनसे अभिलेख तलब करने के निर्देश दिए हैं। गुरुवार को तहसीलदार अशोक चौधरी, वन क्षेत्राधिकारी माजिद इब्राहिम पीपली वन पहुंचे ओर 15 गांव के ग्रामीणों को बुलाकर उनसे वार्ता की और उनसे भूमि के स्वामित्व के सभी रिकार्ड सहित राशन कार्ड, आधार कार्ड, बिजली के बिल सहित अन्य अभिलेख 15 दिन के अंदर वन क्षेत्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
प्रशासन द्वारा शुरू की गई इस कार्रवाई से 15 गांव के में खलबली मच गई है। उन्हें एक बार फिर से बेघर होने का खतरा है। अधिकारियों से वार्ता के दौरान पूर्व जिला पंचायत सदस्य पूरन लाल कंबोज, प्रधान भजन लाल ,दर्शन लाल, भजन लाल, शेरचंद, मंगा राम, अशोक कुमार, गोपाल चंद, प्रदीप कुमार, देश राज सहित भारी संख्या में लोग मौजूद रहे।