रामपुर। कोरोना की दूसरी लहर तो धीरे-धीरे समाप्त हो रही है, लेकिन अब तीसरी लहर की संभावना जताई जा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ओर से कोरोना की तीसरी लहर बच्चों के लिए घातक बनाई जा रही है। इसके लिए शासन की ओर से भी हर जिले में पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) बनाने के निर्देश जारी किए गए हैं। रामपुर के जिला अस्पताल में 20 बेड वाला पीआईसीयू बनकर तैयार भी हो गया है, लेकिन सबसे बड़ी समस्या बाल रोग विशेषज्ञ (पीडियाट्रीशियन) की है। जिले में मात्र 12 पीडियाट्रीशियन हैं जबकि शून्य से 14 साल तक के लगभग 4.5 लाख बच्चे हैं। ऐसे में जिले में लगभग 37,500 बच्चों पर एक बाल रोग विशेषज्ञ हैं।
जिले में कोरोना की दूसरी का अच्छा खास असर रहा। यह लहर अब धीरे-धीरे थमने लगी है। दूसरी लहर में बच्चे बहुत ज्यादा कोरोना की चपेट में नहीं आए थे, लेकिन अब डब्ल्यूएचओ की अरो से कोरोना की तीसरी की संभावना व्यक्त की जा रही है। इसके बारे में कहा जा रहा है कि यह बच्चों को अपनी चपेट में ले सकता है। इसको लेकर शासन स्तर पर तैयारी भी शुरू कर दी गई है। प्रदेश सरकार ने हर जिले में पीआईसीयू बनाने का निर्देश भी जारी कर दिया गया है। मगर सबसे बड़ी समस्या बाल रोग विशेषज्ञों के लेकर है। जिले में बाल रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों की संख्या मानक के मुताबिक बहुत ही कम है। डब्ल्यूएचओ के मानदंड के मुताबिक एक हजार व्यक्ति पर एक डॉक्टर होना चाहिए। यहां तो लगभग 37,500 बच्चों पर एक बाल रोग विशेषज्ञ हैं। इन 12 बाल रोग विशेषज्ञों में सरकारी से लेकर निजी क्लीनिक चलाने वाले डॉक्टर शामिल हैं। जिला अस्पताल में एक नियमित और एक संविदा पर बाल रोग चिक्तिसक तैनात हैं। महिला जिला अस्पताल स्थित सिक न्यू बोर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में दो नियमित (संबद्ध) और एक संविदा पर बाल रोग चिकित्सक की तैनाती है। महिला अस्पताल में तैनात एक वरिष्ठ परामर्शदाता भी बाल रोग चिकित्सक हैं। इसके अलावा छह निजी चिकित्सक ऐसे हैं जो बाल रोग विशेषज्ञ हैं।
जिले में संचालित तीन एफआरयू पर भी नहीं है पीडियाट्रिक
रामपुर। जिले में शाहबाद, मिलक और टांडा सीएचसी फस्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) के रूप में स्वीकृत हैं। इन पर भी एक-एक बाल रोग चिकित्सक की तैनाती होनी चाहिए, लेकिन मौजूदा समय पर तीनों एफआरयू पर बाल रोग विशेषज्ञ नहीं हैं।
क्या किए जा रहे हैं उपाय
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. संजीव यादव का कहना है कि संभावित खतरे को देखते हुए जिला अस्पताल में 20 बेड वाला पीआईसीयू तैयार कर लिया गया है। इसके अलावा 12 बडे वाला एसएनसीयू भी है। आवश्यकता पड़ने पर आउट सोर्सिंग से बाल रोग विशेषज्ञों की तैनाती की जाएगी। एक बाल रोग विशेषज्ञ, एक एमडी, एक नर्स और एक मेंटर को नोएडा में विशेष ट्रेनिंग के लिए भेजा गया है। ये लोग वहां से मास्टर ट्रेनर के रूप में ट्रेनिंग लेकर आएंगे। इसके बाद यहां के चिकित्सकों और कर्मियों को इस बारे में प्रशिक्षित करेंगे। इसके अलावा केजीएमयू, लखनऊ की ओर से एक वर्चुअल ट्रेनिंग प्रोग्राम संचालित किया जा रहा है, जिसमें यहां के कई चिकित्सक बच्चों के इलाज के बारे में जानकारी हासिल कर रहे हैं।