रामपुर। छोटी कक्षाओं के बच्चों में कोविड संक्रमण काल में मानसिक तनाव के कई मामले सामने आए। अब भी लगातार इस तरह केस सामने आ रहे हैं लेकिन पहले की अपेक्षा अब सुधार है। मनोचिकित्सक, काउंसलर और शिक्षक बच्चों को मानसिक तनाव से उबारने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। बच्चे तेजी से तनाव से उबर रहे हैं, लेकिन अभी उन्हें प्रोत्साहित करते रहने की जरूरत है। बच्चों के मोबाइल से चिपके रहने की दिक्कतें भी कम हुई हैं। कोविड महामारी में लोग घरों में पूरी तरह से कैद हो गए। उस समय इसका सबसे ज्यादा असर छोटी कक्षा के बच्चों पर पड़ा। करीब दो साल तक चली ऑनलाइन कक्षाओं से हर कक्षा के विद्यार्थियों की आदत मोबाइल, टैबलेट और कंप्यूटर से चिपके रहने की बन गई। उनका स्वभाव भी चिड़चिड़ा होने लगा। घर से बाहर निकलने पर पाबंदी ने बच्चों को अवसाद की ओर धकेल दिया। यह अभिभावकों के लिए परेशानी का सबब बन गई। करीब दो साल बाद जब इस सत्र में विद्यालय खुले तो बच्चों की इस लत से स्कूल में शिक्षकों का सामना हुआ। सीबीएसई के कई स्कूलों में मनोचिकित्सकों का भी सहारा लिया गया। अब इन मामलों में काफी हद तक कमी आई है। ऑफलाइन पढ़ाई शुरू होने के बाद मोबाइल से बच्चों की दूरी बन गई है।