जिला महिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में एक माह में पीलिया से पीड़ित 26 शिशुओं को कराया गया भर्ती
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर। जिले में इन दिनों नवजातों में पीलिया का खतरा बढ़ गया है। इसका कारण गर्भवतियों की ठीक से देखभाल न होना भी बताया जा रहा है। जिला महिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में भर्ती 89 बच्चों में से 26 शिशुओं में पीलिया के लक्षण पाए गए, जिसमें से तीन का अब भी उपचार चल रहा है। वहीं चिकित्सकों ने बताया कि शिशुओं के इलाज में फोटोथैरेपी ज्यादा कारगर साबित हो रही है।
जिला अस्पताल में पीलिया से ग्रसित नवजात बच्चों की संख्या महीने भर में पांच से छह रहती थी जो अब बढ़कर 26 तक पहुंच चुकी है। अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में एक माह में 89 शिशुओं को भर्ती कराया गया है। जिममें से 26 बच्चों में पीलिया के लक्षण पाए गए।
पीलिया के लक्षण वाले 23 शिशु स्वस्थ होकर अपने घर जा चुके हैं जबकि तीन बच्चों की फोटोथैरेपी की जा रही है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केसी जोशी ने बताया कि माताएं गर्भधारण के दौरान यदि सजग रहें तो बच्चों में पीलिया की शिकायत नहीं आएगी। ओपीडी में अधिकांश बच्चे वायरल के आ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि अस्पताल में 70 फीसदी बच्चे सीने में जकड़न और सांस में तकलीफ के आ रहे हैं। बताया कि मौसम काफी ठंडा है, ऐसे में बच्चों में संक्रमण की शिकायत अधिक आ रही है। बच्चों को गर्म कपड़े पहनाएं और ठंड से बचाकर रखें, इसके अलावा इस मौसम में बच्चों को पानी से दूर रखें।
जिला महिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में भर्ती पीलिया से पीड़ित से तीन बच्चों का उपचार चल रहा है। चिकित्सक समय-समय पर एसएनसीयू वार्ड का निरीक्षक कर बच्चों का चेकअप कर रहे हैं। -डॉ. पराग, एसएनसीयू नोडल
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सभी चिकित्सक लगातार ओपीडी में समय से बच्चों को देख रहे हैं। ठंड को देखते हुए जिला अस्पताल में सुविधाएं बढ़ा दी गई हैं। इलाज के लिए आ रहे बच्चों का बेहतर इलाज किया जा रहा है। -डॉ. अनवर, सीएमएस
एक माह में हुईं 250 डिलीवरी
रामपुर। जिला महिला अस्पताल में 20 नवंबर से 20 दिसंबर तक 250 डिलीवरी हुई हैं। जिसमें से 187 डिलीवरी नॉर्मल और 63 ऑपरेशन से हुईं। जिसमें 26 नवजातों में पीलिया के लक्षण पाए गए, जिनका अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में भर्ती कर इलाज किया गया। भर्ती बच्चों में से 23 नवजात बच्चे स्वस्थ होकर अपने घर जा चुके हैं, जबकि तीन बच्चों का अब भी उपचार चल रहा है। संवाद