सूबे में सत्ता परिवर्तन के बाद चीनी मिल की जमीन पर बन रही जेल का निर्माण जल्द शुरू होगा। इसके लिए पूर्व मंत्री आजम खां के करीबी ठेकेदार को हटा दिया गया है। अब यह काम लखनऊ के ठेकेदार को मिला है। सीएंडडीएस ने इस बाबत कवायद शुरू कर दी है।
समाजवादी सरकार में शहर में नई जेल के निर्माण की कवायद शुरू हुई थी। तत्कालीन मंत्री आजम खां के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल नई जेल के निर्माण को शासन ने तुरंत मंजूरी भी दे दी थी। इसके लिए बीस करोड़ रुपये जारी कर दिए। बाद में जेल के लिए जमीन की तलाश शुरू की गई। अफसरों ने सिविल लाइंस स्थित चीनी मिल की जमीन का चयन किया, इसके बाद कारागार विभाग ने चीनी निगम से जमीन खरीद ली थी। लेकिन, चीनी मिल कालोनी में रह रहे लोगों ने जमीन खाली करने से इनकार कर दिया, जिस पर उन्हें जबरन निकालने की कोशिश की गई। करीब 42 आवास तोड़ भी दिए गए थे।
कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज ने फरवरी 2015 में चीनी मिल का निर्माण शुरू करा दिया। करीब दस माह तक यह काम चला। इस बीच कई बार कानूनी पेंच भी फंसें। मामला हाईकोर्ट तक गया। चीनी मिल कालोनी के बाशिंदों को स्टे भी मिला, लेकिन बाद में हाईकोर्ट ने स्टे खारिज कर दिया। इसके चलते कई माह से जेल का काम रुका रहा।
बाद में यह काम फिर से शुरू हुआ, लेकिन तब तक सूबे में सरकार बदल चुकी थी। चीनी मिल कालोनी के बाशिंदों की गुहार पर सरकार ने निर्माण रोकने के आदेश जारी कर दिए। इसके बाद यह आशंका जताई जा रही थी कि जेल का काम अब नहीं होगा, लेकिन पिछले दिनों ही शासन से जेल का निर्माण कार्य पूरा करने के आदेश जारी कर दिए। साथ ही चीनी मिल की जमीन को अवैध कब्जों से मुक्त कराने के भी निर्देश दिए। इस पर कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस ने निर्माण कार्य शुरू करा दिया, लेकिन यह काम महज एक दिन ही चला। ठेकेदार को बदलने के चलते काम रोक दिया गया।
दरअसल, इस प्रोजेक्ट पर पूर्व मंत्री आजम खां के करीबी ठेकेदार काम कर रहे थे, जिसके चलते उन्हें हटा दिया गया है। अब यह कार्य लखनऊ के नए ठेकेदार को
मिला है।