रामपुर। सबसे छोटे बेटे अब्दुल करीम के जाने का गम मां सलमा सहन नहीं कर पा रही हैं। रोते-रोते जब वह थक गईं तो अपने बेजान बेटे को टकटकी लगाकर घंटों निहारती रहीं। घर पहुंचने वाला हर व्यक्ति उन्हें ढांढस बंधाता रहा लेकिन उनकी नजरें लगातार अपने बेटे पर ही टिकी रहीं। पिता शन्नू भी घर की दीवार से सिर टिकाकर फूट-फूटकर रोते रहे।
मंगलवार को पोस्टमार्टम के बाद जब अब्दुल करीम का शव घर पहुंचा तो मां सलमा दहाड़े मारकर रोने लगीं। वह बार-बार करीम का नाम लेकर बेहोश हो जातीं, उन्हें मोहल्ले की महिलाएं बार-बार संभालतीं।
बालक को अंतिम बार देखने के लिए मोहल्ले के लोगों की भीड़ बढ़ने लगी तो जगह कम होने के कारण शव को पास में रहने वाले रिश्तेदार के घर ले जाया गया। परिचितों और रिश्तेदारों के आने का सिलसिला जारी रहा।
घर आने वाला हर व्यक्ति मां सलमा को सांत्वना देकर लौट जाता, लेकिन सलमा की नजरें लगातार अपने बेटे पर टिकी रहीं। बार-बार उनके चेहरे को इस उम्मीद से छूती कि शायद वह उठ जाए। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। देर शाम तक परिचितों और रिश्तेदारों का तांता लगा रहा।
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मोहल्ले में पसरा रहा सन्नाटा
रामपुर। नई बस्ती में, जहां रोजाना बच्चों की चहल-पहल और लोगों की आवाजाही रहती थी, मंगलवार को सन्नाटा पसरा रहा। मोहल्ले के लोग लगातार घर पहुंचकर परिवार को सांत्वना देते रहे और मासूम को श्रद्धांजलि अर्पित करते रहे। संवाद
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आज होगा दफन, रिश्तेदारों का इंतजार
रामपुर। मोहल्ले के लोगों ने बताया कि बुधवार को अब्दुल करीम को सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। परिवार के कुछ रिश्तेदार बाहर से आ रहे हैं। उनके पहुंचने में देरी होने के कारण दफन एक दिन बाद करने का निर्णय लिया गया।