रामपुर। सुबह से निर्जल और निराहार व्रत रखकर सुहागिनों ने आकाश में चंद्रदेव के उदय होते ही अर्घ्य देकर पति की दीर्घायु का वर मांगा। इसके बाद छलनी से चंद्र देव और पति के दर्शन कर पति के हाथ से जल पीकर सुहागिनों ने व्रत खोला और भोजन ग्रहण किया।
पति के लिए अमृत्व का वर मांगने और अपने लिए अखंड सौभाग्य की कामना करते हुए सुहागनों ने बुधवार को करवाचौथ का व्रत रखा। भोर की पहली किरण के साथ ही प्रात: कालीन पूजन कर सुहागिनों ने पति के चरण स्पर्श कर उपवास की शुरुआत की।
मंगलवार रात सरगी की मिठाई से शुरू हुआ करवा चौथ उपवास बुधवार रात तो चंद्रोदय के पश्चात पूजन, जल अर्पण के बाद छलनी से चांद और पति के दर्शन और पति के हाथ से जल ग्रहण करने पर पूरा हुआ। सुबह की पूजा के बाद शाम को श्रृंगार कर सुहागिनों ने करवे में जल भरकर भगवान श्री गणेश का पूजन किया और करवाचौथ की कथा सुनी और सुनाई। भगवान श्री गणेश को पुए का भोग लगाया। रात में करीब साढ़े आठ बजे आकाश में चंद्रोदय होते ही सुहागनों ने अमृत रश्मि निर्गत करने वाले चंद्र देव को करवे से अर्घ्य देकर पति के अमृत और अपने लिए अंखड सौभाग्य की कामना की। चंद्रदर्शन पश्चात पति का दर्शन कर उनका पूजन किया। पति के हाथों जल ग्रहण किया। तत्पश्चात पति के संग भोजन ग्रहण किया।