दो करोड़ रुपये से अधिक की कर चुके हैं ठगी
सीओ ने बताया कि पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपी अभी तक दो करोड़ रुपये की साइबर ठगी कर चुके हैं। ये लोग साइबर ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करते थे। इसके अलावा यूपीआई, चेकबुक आदि के माध्यम से निकालते भी थे।
35 बैंक खातों के 12 लाख रुपये कराए फ्रीज
पुलिस ने गैंग के लोगों को गिरफ्तार कर अलग-अलग बैंक के 35 खाते फ्रीज कराए हैं। इन खातों में 12 लाख रुपये फ्रीज कराए गए हैं। एसपी विद्यासागर मिश्र ने बताया कि अन्य खातों की जानकारी ली जा रही है। जल्द ही उनको भी फ्रीज किया जाएगा। बताया कि मुख्य आरोपी फिर भागने में सफल रहा है। वह छापे के दौरान घर पर नहीं था।
दुबई से संचालित होता था गैंग
साइबर ठगी करने वाला यह गिरोह पुलिस से बचने के लिए अत्याधुनिक तरीके अपनाता था। पकड़े गए आरोपियों ने बताया कि गिरोह का सरगना हर 10 मिनट में व्हाट्सएप पर टीम लीडर को मैसेज करता था और तीन से पांच मिनट के भीतर उसका जवाब न मिलने पर पूरा ऑपरेशन बंद कर देता था।
पुलिस की ओर से गिरफ्तार छह आरोपियों विवेक यादव, रितिक और उत्तम पटेल आदि ने बताया कि यह गिरोह दुबई से संचालित होता था। आरोपियों को 20 से 25 हजार रुपये प्रतिमाह पर रखा गया था और उनका काम गेमिंग एप से आए पैसों को विभिन्न खातों में ट्रांसफर करना था।
आरोपियों के मुताबिक, लीडर के व्हाट्सएप पर हर 10 मिनट में एक मैसेज आता था, जिसका तुरंत जवाब देना अनिवार्य था। यदि जवाब नहीं आता, तो सरगना सभी खाते बंद करके अपना नंबर स्विच ऑफ कर देता था। और व्हाट्सएप ग्रुप को डिलीट कर देता था।
इसके बाद एक व्यक्ति रेकी के लिए भेजा जाता और स्थिति सामान्य होने पर ही ऑपरेशन फिर से शुरू होता था। आरोपियों ने बताया कि अगर पुलिस गैंग को पकड़ लेती तो, गैंग सरगना इस काम को दूसरी जगह शिफ्ट कर देते हैं। दिल्ली एनसीआर में इस तरह कई लोग मानदेय पर काम कर रहे हैं।
आरोपियों ने यह भी दावा किया कि गिरफ्तारी के समय फ्लैट में आठ लोग मौजूद थे और उन्हें बाहर जाने की अनुमति नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरगना की बीएमडब्ल्यू बाइक फ्लैट के नीचे खड़ी थी, लेकिन पुलिस केवल उसकी नंबर प्लेट ही लेकर आई है।
रेडी अन्ना गेमिंग एप का पैसा करते थे इधर-उधर
आरोपियों ने बताया कि वे रेडी अन्ना गेमिंग एप के लिए काम करते थे। उनका काम सिर्फ गेमिंग एप से आए पैसे को अन्य अकाउंट में स्थानांतरित करना था। उन्होंने बताया कि उनके पास अकाउंट नंबर और उसके ई-बैंकिग पासवर्ड गैंग के सरगना की ओर से भेजे जाते थे। इसकी मदद से वह पैसे ट्रांसफर दूसरे अकाउंट में करते थे। कहा कि इस समय वे 30 अकाउंट में पैसा इधर-उधर डाल रहे थे।
गैंग की करोड़ों की प्रॉपर्टी पुलिस करेगी सीज
एसपी विद्यासागर मिश्र ने बताया कि पुलिस और साइबर टीम की जांच में सामने आया है कि अंतरराज्यीय गैंग ने साइबर ठगी करके करोड़ों रुपये की प्रापर्टी खरीदी है। पुलिस इसकी जांच कर रही है। जल्द ही पुलिस इस प्रॉपर्टी को सीज करेगी। इसके लिए अन्य एजेंसियों की भी मदद ली जाएगी।
बाहर नहीं जाने देते थे
आरोपियों ने बताया कि उन्हें बाहर घूमने की अनुमति नहीं थी। उनका खाना फ्लैट में ही आता था। कपड़े और अन्य सामान उन्हें ऑनलाइन मंगाने पड़ते थे। दो महीने से वे लोग बाहर घूमने तक नहीं गए थे। गैंग का सरगना उन पर कड़ी नजर रखता था।
बीटेक करने वाले भी गैंग में शामिल
पुलिस ने जिन आरोपियों को पकड़ा है। उनमें से दो आरोपी 10वीं पास और दो 10वीं फेल हैं। इसमें से एक बी-टेक और एक आईटीआई पास है। आरोपी छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के रहने वाले हैं।
एसपी ने 25 हजार रुपये का दिया इनाम
एसपी विद्यासागर मिश्र ने अंतरराज्यीय गैंग को पकड़ने वाली टीम को 25 हजार रुपये के इनाम की घोषणा की है। एसपी ने बताया कि पुलिस और साइबर टीम साइबर अपराध रोकने के लिए बहुत अच्छा काम कर रही है।