गुझिये के बिना होली का त्योहार अधूरा लगता है। होली के इस विशेष पकवान में मावे का प्रयोग होता है। इसके चलते होली के आसपास मावे की डिमांड काफी बढ़ जाती है। इस डिमांड को पूरा करने के लिए मिलावटखोर भी सक्रिय हो जाते हैं। मिलावटी मावा गुझिये की मिठास को फीका कर सकता है। मिलवाटी मावे की बिक्री पर रोकथाम के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग छापेमारी कर रहा है, लेकिन मिलावटी मावे पर अंकुश लगाने के लिए उनके प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं।
दो दिन बाद होली का त्योहार है। गुझिया बनाने का काम महिलाएं शुरू कर चुकी हैं। सामान्य दिनों में ही आवश्यक दूध की सप्लाई करना दूधियों के लिए चुनौती सा हो गया है। ऐसे में मावा बनाने के लिए दूध की अतिरिक्त सप्लाई कहां से आए। दूध और मावे की बढ़ी इसी डिमांड को पूरा करने के लिए मिलावटखोर सक्रिय हो गए हैं। ये चंद रुपयों के मुनाफे के फेर में आपकी सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक होली पर सिर्फ गुझिया और अन्य मिठाइयां बनाने के लिए ही जिले में करीब सौ क्विंटल से अधिक मावे की खपत होगी।
लोगों की इस जरूरत को पूरा करने के लिए मिलावटखोर सक्रिय हैं और मिलावटी मावे पर अंकुश लगाने के लिए उनके प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं।