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Rampur News: शहद का कारोबार घोल रहा जीवन में मिठास

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रामपुर। सेहत के लिए फायदेमंद शहद शाहबाद के अनवा गांव के लोगों की जिंदगी में भी मिठास घोल रहा है। शहद के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध इस गांव के 50 परिवार शहर के कारोबार से जुड़े हैं। तहसील मुख्यालय से आठ किलोमीटर दूर साढ़े तीन हजार की आबादी वाले गांव अनवा के मधुमक्खी पालक दूसरों के लिए प्रेरणा बने हैं। मधुमक्खियों के हमारे पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभाव को पहचानने और स्वीकार करने के उद्देश्य से हर साल 20 मई को विश्व मधुमक्खी दिवस मनाया जाता है। मधुमक्खियों से मिलने वाला शहद अनवा गांव के लोगों के लिए रोजगार का जरिया बन गया है। प्रत्येक मधुमक्खी पालक के पास सौ से पांच सौ बक्से हैं। एक बक्से से 10 से पच्चीस किलो तक शहद निकलता है।
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मधुमक्खी पालक बताते हैं कि मधुमक्खियों को साल में तीन बार प्रवास कराना ज़रूरी होता है। प्रथम प्रवास अक्तूबर माह से लेकर होली तक होता है। इस समय सरसों की फसल या यूकेलिप्टिस के फूल निकलते हैं। उसके बाद मार्च-अप्रैल से लेकर जुलाई में लीची के बगान में फूल खिलते हैं। फिर जुलाई और अगस्त माह में मधुमक्खियों को ऐसी जगह ले जाया जाता है, जहां पर मधुमक्खी शहद आसानी से बना लें।
इस गांव से सलाना तीन से चार करोड़ रुपये का शहद का कारोबार होता है। गांव से करीब सौ टन से अधिक शहद का उत्पादन कर देश के विभिन्न राज्यों को भेजा जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों में शहद एक हजार रुपये तक बिक जाता है।
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मेरे पास मधुमक्खी के 350 बक्से हैं। मैंने 20 हजार रुपये से 18 वर्ष पूर्व शहद के कारोबार की शुरुआत की थी। कई लोगों को प्रशिक्षण देकर इस कारोबार से जोड़ चुका हूं। अब अपने शहद की खुद पैकिंग कर रहा हूं। मेरा सलाना कारोबार करीब दो करोड़ रुपये का है। फिलहाल मेरे मधुमक्खी के बक्से जम्मू-कश्मीर में रखे हुए हैं। - जगदीश कुमार मौर्य, कारोबारी एवं मधुमक्खी पालक।




मैं पिछले आठ साल से शहद के कारोबार से जुड़ा हुआ हूं। मैंने अपने कई दोस्तों और भाइयों को भी इस कारोबार के साथ से जोड़ लिया है। अच्छा मुनाफा हो रहा है। पैकिंग करके शहद बेचता हूं। - नितिन कुमार मौर्य, कारोबारी एवं मधुमक्खी पालक

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मैं पहले निजी कंपनी में नौकरी करता था। घर से काफी दूर था। मेरे गांव अनवा में शहद का कारोबार लंबे समय से हो रहा है। इसलिए मैं भी अन्य कारोबारियों से प्रेरित हुआ और नौकरी छोड़कर शहद के कारोबार और मधुमक्खी पालन का काम शुरू कर दिया। - अमित कुमार, कारोबारी एवं मधुमक्खी पालक
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