होलिका दहन के साथ पूरे जिले में होली का हुड़दंग शुरू हो गया। लोगों ने होलिका दहन और पूजन किया। गन्ना, गेहूं की बाली, बलगुरी, मिष्ठान, गुलाल, गुझिया आदि होलिका में अर्पित कर पूजन किया। होलिका दहन से पहले भी जिले भर में होली का उल्लास रहा। दिन भर लोगों ने होलिका दहन के लिए पूजन सामग्री खरीदी। होली को लेकर गन्ने के दाम भी काफी बढ़े रहे।
रात में करीब आठ बजे से होलिका दहन के मुहूर्त के साथ ही लोगों ने होलिका दहन स्थल पर जाकर पूजन किया। बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक होली त्योहार पर अपनी सभी बुराइयों को होलिका दहन के साथ ही नष्ट करने का संकल्प लिया। भद्रा नक्षत्र हालांकि 7:38 बजे तक थी लेकिन, लोगों ने आठ बजे करीब से ही होलिका दहन किया।
होलिका दहन पूजन रात करीब नौ बजे तक किया गया, इसके बाद मध्य रात्रि के बाद भी लोगों ने होलिका दहन पूजन किया। पंडित नवनीत शर्मा ने बताया कि रात में करीब आठ बजे से नौ बजे तक और इसके बाद मध्यरात्रि में करीब साढ़े बारह बजे के बाद से ढाई बजे तक होलिका दहन पूजन का लगन था। बाजार में होलिका पूजन को लेकर गन्ने की काफी डिमांड रही, बाजार में बीस से तीस रुपये तक गन्ना बिका, जबकि शाम के वक्त इसके दाम 40 रुपये तक पहुंच गए।
मिलक नगर एवं क्षेत्र में होली पर्व को लेकर रंग और अबीर- गुलाल जमकर बरसना शुरू हो गया। पर्व को लेकर रंगों एवं पिचकारी तथा मिठाइयों की दुकानें सजीं।जहां खरीददारी की गई। पर्व को लेकर गन्ने और जौ की खरीददारी की गई। शाम को होलिका दहन स्थल पर पूजन किया गया।