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Rampur News: इबादत में झुके सिर, दुआ में उठे हजारों हाथ

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रामपुर। शहर से लेकर देहात तक रामपुर सोमवार को बकरीद का त्योहार प्यार और भाईचारे के साथ मनाया। शाहबाद गेट स्थित ईदगाह में शहरकाजी सैयद खुशनूद मियां नमाज अदा कराई। नमाज के बाद दुआ कराई गई, जिसमें हजारों लोगों ने मुल्क और कौम की तरक्की के लिए दुआ की। इसके अलावा जिले की अन्य ईदगाहों और मस्जिदों में भी नमाज हुई। नमाज के बाद सभी एक-दूसरे के गले मिलकर मुबारकबाद दी। नमाज के बाद कुर्बानी का सिलसिला शुरू हुआ।
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शाहबाद में ईदगाह में नमाज से पहले शाही इमाम मोहम्मद सलमान ने तकरीर पेश की। तकरीर के बाद निर्धारित समय सात बजे नमाज अदा कराई। नमाज पढ़ने के बाद खुतबा पेश किया। ईद पर लगने वाले मेले में में भी बच्चों ने जमकर लुत्फ उठाया। सैफनी में ईदगाह में शहर इमाम कारी अतीक उर रहमान ने विशेष खुतबा पढ़ा और नमाज अदा कराई।
बिलासपुर में माटखेड़ा रोड स्थित ईदगाह में ईद की नमाज शहर इमाम मौलाना नासिर खां ने सुबह 7:30 बजे अदा कराई। ग्राम खोदलपुर खेड़ा स्थित दरगाह पर सुबह 8:00 बजे ईद की नमाज फरमान मियां ने अदा कराई और मुफ्ती बिलाल बिलासपुरी ने तकरीर की। मोहल्ला कायस्थान की जामा मस्जिद में कारी अफरोज आलम ने नमाज अदा कराई और बारिश के लिए दुआ की। इसके अलावा क्षेत्र की सभी छह ईदगाहों व 62 मस्जिदों में भी लोगों ने ईद की नमाज अदा की। इ
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पंजाबनगर में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष हाफिज अब्दुल सलाम के आवास पर भी ईद मिलन का कार्यक्रम हुआ। खजुरिया क्षेत्र में बकरीद के त्योहार पर क्षेत्र की 38 मस्जिदों और 14 ईदगाहों में ईद की नमाज को सकुशल संपन्न हुई। केमरी में गढ़ी ईदगाह मौलाना मोहसिन व बड़ी ईदगाह सैंजनी पर मौलाना जलाल ने नमाज अदा करवाई।
वहीं क्षेत्र के मुंडिया कलां, हुरमतनगर, सिमरिया, रहसेना, स्वार खुर्द, खानपुर, भटपुरा, लालानगला आदि गांवों में भी शांतिपूर्ण तरीके से नमाज पढ़ी गयी। भोट क्षेत्र में बकरीद का त्योहार हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। ईदगाह और मस्जिदों में बड़ी अकीदत के साथ नमाज अदा की गई। भोट में स्थित ईदगाह के इमाम मौलाना अकरम सकलैनी ने नमाज अदा कराई।
दढ़ियाल में ईदगाहों और प्रमुख मस्जिदों में नियत समय पर ईद की नमाज अदा की गई। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगकर ईद की बधाईयां दी। इसके अलावा स्वार, मसवासी, सैदनगर, टांडा, पटवाई, मिलक, मिलकखानम में भी ईद की नमाज शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई।



शहरकाजी ने बताया कुर्बानी का मतलब
नमाज से पहले शहरकाजी सैयद खुशनूद मियां ने बकरीद मनाने की जानकारी दी। कहा कि कई सौ साल पहले हजरत इब्राहिम ने अपने बेटे हजरत इस्माइल को कुर्बानी के लिए पेश कर दिया, लेकिन अल्लाह ने हजरत इस्माइल को कुर्बानी करने से बचाया। अल्लाह ने दुंबा भेज दिया। तब से ही बकरीद का त्योहार मनाया जाने लगा। शहरकाजी ने कहा कि हर हैसियत वाले लोगों को जब तक उन पर माल रहे हर साल उस पर कुर्बानी करना वाजिब है। कुर्बानी के जानवर के हर बाल के बराबर अल्लाह नेक बंदे को नेकियां फरमाएगा। बाहर कुर्बानी न करें, नगर पालिका की गाड़ियों में अवशेष डालें। साफ-सफाई के साथ सभी धर्मों का सम्मान करते हुए त्योहार मनाएं। झूठ, गीबत, हसद, फरेब, किनाह, एक दूसरे से नफरत करने से बचें, कत्ल जैसा गुनाह हरगिज न करें। जुआ, सट्टा, शराब या कोई नशे की चीज इस्तेमाल न करें।
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