गंगा को निर्मल बनाने के अभियान पर भले ही सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही हो,लेकिन रामपुर की कोसी इस तरह के अभियान को झटका दे रही है। उत्तराखंड की फैक्ट्रियां लगातार कोसी नदी में अपना कचरा बहा रही हैं,जिससे पूरी कोसी नदी काली हो गई है। कोसी का पानी इतना प्रदूषित हो चुका है कि यह पानी अब पीने लायक तक नहीं रह गया है।
केंद्र सरकार ने गंगा नदी को स्वच्छ बनाने के लिए मिशन चालू किया है। केंद्र सरकार की ओर से गंगा स्वच्छता पखवाड़ा शुरू किया गया है। 31 मार्च तक शुरू किए इस पखवाड़े के तहत गंगा नदी को स्वच्छ करने के लिए जहां एक ओर जागरुकता रैलियों का आयोजन किया जाना है,वहीं नदी किनारे पौधरोपण, गंगा स्वच्छता की शपथ, घाट अपनाओ अभियान भी चलाया जाना है। गंगा की सफाई पर सरकार की ओर से करोड़ों रुपये अभी तक खर्च किए जा चुके हैं,लेकिन रामपुर की कोसी नदी इस तरह के अभियानों से दूर हो चली है। रामपुर की कोसी नदी लगातार मैली हो रही है।
कोसी नदी का कचरा लगातार बह रहा है,इसकी वजह से स्वच्छता के अभियान को चलाए जाना बेइमानी है। उत्तराखंड से शुरू हुई कोसी नदी स्वार से होती हुई रामपुर और फिर शाहबाद होती हुई रामगंगा नदी में जाकर मिल जाती है। यानि उत्तराखंड की गदंगी बहकर यूपी में आती है और फिर सीधे तौर पर यह गंगा में जाकर मिल जाती है। कोसी नदी में ही रामपुर से सीवरेज प्लांट का पानी भी छोड़ा जा रहा है,जिसकी वजह से यह नदी और भी गंदी हो रही है। यानि कुल मिलाकर यूपी सरकार की सुस्ती की वजह से कोसी नदी अब भंयकर रूप से काली हो चुकी है। यानी केंद्र सरकार का यह अभियान काली कोसी नदी को झटका दे रहा है।