रामपुर। मनरेगा में घपलों की शिकायतों पर शुरू हुई जांच में अब एपीओ, तकनीकी सहायक, ग्राम प्रधान, रोजगार सेवक से लेकर ग्राम पंचायत सचिव तक पर कार्रवाई की आंच आ गई है। फर्जीवाड़े को लेकर प्रारंभिक जांच में तकनीकी सहायकों की भूमिका सबसे अधिक संदिग्ध पाई गई है। जांच में तकनीकी सहायकों द्वारा मेजरमेंट बुक से लेकर एस्टीमेट बनाने तक में फर्जीवाड़ा किए जाने की बातें सामने आई हैं।
मनरेगा में एक के बाद एक घपले के आरोपों के बाद जब कुछ शिकायतें सही पाई गईं तो जिलाधिकारी आंजनेय कुमार सिंह ने सीडीओ की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी गठित कर जांच के आदेश दिए हैं। जांच कमेटी की प्रारंभिक जांच में फर्जीवाड़े और घपले को लेकर सबसे अधिक संदिग्ध भूमिका तकनीकी सहायकों की पाई गई है। इतना ही नहीं मनरेगा में फर्जीवाड़े की परतें खुलेंगी तो तकनीकी सहायक ही नहीं जांच के बाद कार्रवाई की आंच एपीओ, ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सचिव और रोजगार सेवक तक आएगी। किसी के द्वारा फर्जीवाड़े में सहयोग तो कोई वेरिफिकेशन या अन्य कामों को लेकर अपनी जिम्मेदारी में लापरवाही बरतने का दोषी पाया जाएगा।