नवरात्र के पांचवें दिन देवी मां के कूष्मांडा स्वरूप का पूजन हुआ। भक्तों ने उदर की देवी को प्रसन्न करने के लिए शाक-सब्जी और अन्न का दान किया। मंदिरों में भजन-कीर्तन कर मां की महिमा का गुणगान किया।
नवरात्र के पांचवें दिन बुधवार को देवी के मां कूष्मांडा स्वरूप का पूजन हुआ। प्रात: काल ब्रह्म मुहूर्त से ही मंदिरों को पट खुलने के साथ शंख, घंटे और घड़ियाल की ध्वनि के बीच मंदिर पहुंचे देवी भक्तों ने मां का पूजन किया। मां को शाक-सब्जी चढ़ाई। इसके साथ ही शाक-सब्जी और अन्न का दान किया। करतल ध्वनि के साथ मां की आरती उतारी। पंडित विश्वनाथ मिश्रा ने बताया कि भगवती का यह स्वरूप अन्नपूर्णा का है। ईशत हास्य से सृष्टि का विस्तार करने वाली यह मां उदर की देवी हैं।
मां के इस स्वरूप की पूजा घर को धन-धान्य से परिपूर्ण करती है। मां कूष्मांडा प्रकृति और पर्यावरण की अधिष्ठात्री देवी हैं। माता के इस रूप में तृप्ति और तुष्टी दोनों हैं। मंदिरों में देर शाम से रात तक भक्तों ने भजन-कीर्तन कर मां की महिमा का गुणगान किया। शहर के मंदिर महालक्ष्मी मंदिर, गुरुयानी जी मंदिर, दत्ताराम शिवालय, नर्मदेश्वर मंदिर, जिला पंचायत रोड स्थित शिव मंदिर, मनोकामना मंदिर, माई की कुटिया, समेत समस्त मंदिरों में पूरे दिन भक्तों की चहल-पहल रही।