बारिश और तेज हवा से जिले में गेहूं की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। खेतों में खड़ी गेहूं की फसल गिर गई है। किसानों को पिछले साल तरह इस साल भी भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। गेहूं की जो फसल गिर है उसका दाना खराब हो जाएगा। ऐसे में प्रति हेक्टेयर उत्पादन प्रभावित होगा। चालू रबी सीजन जिले में लगभग डेढ़ लाख हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई की गई है। गेहूं की फसल लगभग तैयार हो चुकी है। उसमें दाने भी बन गए हैं।
पिछले दो-तीन दिनों से तेज हवा के साथ हो रही बारिश से गेहूं की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। जनपद के सभी तहसीलों क्षेत्रों में भी गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचा है। बारिश के साथ तेज हवा से गेहूं की फसल खेतों में ही गिर गई है। ऐसे में गेहूं का उत्पादन घटने के साथ क्वालिटी भी खराब हो जाएगी। किसानों को चिंता है कि अगर मौसम का मिजाज और बिगड़ गया तो पिछले साल की तरह बर्बादी का मंजर देखना पड़ जाएगा।
पिछले साल बारिश और ओला पड़ने से गेहूं की फसल को भारी नुकसान पहुंचा था। गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचने के सदमे में कई किसानों की मौत भी हो गई थी। हालांकि किसानों को मुआवजा दिए जाने का एलान किया गया था, लेकिन सभी किसानों को मुआवजा भी नहीं मिला। मुआवजा मिला तो इतना कम कि नुकसान की भरपाई भी न हो सके।
किसानों को अब चिंता सताने लगी है कि अगर मौसम के मिजाज में सुधार नहीं हुआ तो गेहूं की फसल पिछले साल की तरह बर्बाद हो जाएगी। जनपद में बिलासपुर, स्वार, टांडा, मिलक, सैदनगर, शाहबाद सभी तहसीलों के गांवों में गेहूं की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। सैदनगर क्षेत्र के हकीमगंज, सींगनखेड़ा, खौद, लालपुर, करनपुर, देवरिया, बगडख़ा, काशीपुर समेत कई गांवों में गेहूं की फसल खेतों में बिछ गई।
मौसम के बदलते मिजाज को देखते हुए किसानों की चिंता बढ़ गई है। बारिश और तेज हवा से जिले में गेहूं की फसल को कितना नुकसान पहुंचा है उसका आंकड़ा अभी तक जिला प्रशासन व कृषि विभाग के पास नहीं है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस संबंध में आंकड़े जुटाए जा रहे हैं। नुकसान को लेकर शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी। आम बाग स्वामियों को भी भारी नुकसान पहुंचा है।