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Rampur News: मानसून से पहले 215 गांवों को बाढ़ से बचाने की कवायद तेज

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रामपुर। जून में मानसून की दस्तक के साथ जिले के 215 गांवों को बाढ़ से बचाने की चुनौती होगी। बाढ़ से गांवों को राहत देने के लिए प्रशासनिक अधिकारियाें ने तैयारियां तेज कर दी हैं। जिलाधिकारी जोगिंदर सिंह लगातार क्षेत्र का दौरा कर तटबंध बनाने पर जोर दे रहे हैं। रामपुर जिले में एक ओर कोसी नदी तो दूसरी ओर रामगंगा है, जबकि बहल्ला नदी के किनारों से जिला घिरा है। खासतौर से स्वार, टांडा, बिलासपुर व शाहबाद क्षेत्र पर बाढ़ का अधिक खतरा रहता है। क्षेत्र के दो सौ से ज्यादा गांवों में करीब एक लाख से ज्यादा लोगों पर बाढ़ का खतरा रहेगा। इन 215 गांवों में शाहबाद तहसील क्षेत्र के 70 गांव, बिलासपुर के 39, सदर क्षेत्र के 38, टांडा क्षेत्र के 37, मिलक क्षेत्र के 9 गांव शामिल हैं। बाढ़ से लोगों को बचाने के लिए प्रशासन की ओर से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
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जिलाधिकारी जोगिंदर सिंह ने पिछले सप्ताह बाढ़ से निपटने के लिए स्वार क्षेत्र के कई गांवों का निरीक्षण किया था, जिसके बाद कई स्थानों पर तटबंध बनने शुरू हो गए हैं। प्रशासन ने जिले में बाढ़ से प्रभावित रहने वाले 35 गांवों में बाढ़ चौकियां स्थापित कर दी हैं। जिनमें सदर में सात चौकी, मिलक में चार, टांडा में छह, स्वार में छह, शाहबाद में छह, बिलासपुर में छह चौकी बनाई गईं हैं। इसके साथ प्रशासन ने जिला व तहसील स्तर पर बाढ़ स्टेयरिंग कमेटी का गठन कर दिया है, प्रत्येक विभाग ने भी प्लान तैयार कर लिया है।
प्रशासन ने बाढ़ की सूचना देने के लिए कंट्रोल रूम स्थापित कर दिया है। वहीं सिंचाई विभाग, लोक निर्माण विभाग, स्वास्थ्य विभाग समेत अन्य विभागों ने भी अपनी कार्य योजना को तैयार कर लिया है। जिलाधिकारी ने सभी एसडीएम व तहसीलदारों के साथ ही सिंचाई व नहर विभाग के अधिशासी अभियंताओं को बाढ़ से निपटने के कड़े इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं।
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बाढ़ रोकने के किए जा रहे उपाय

रामपुर में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सिंचाई विभाग संवेदनशील इलाकों में होल्डर स्टड और बोल्डर एफऑन लगा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि होल्डर स्टड पानी को आगे नहीं बढ़ने देगा। ये 310 मीटर में लगाए जाएंगे। इसके साथ ही बोल्डर एफऑन यानी एक मोटा जीआई वायर जो पानी को रोकने का काम करेगा। इसको भी चारों तरफ लगाया जाएगा। इसमें तेज गति से आते हुए पानी को रोकने की क्षमता भी होती है। स्वार क्षेत्र का मदारपुर गांव में चारों ओर से पानी रोकने की व्यवस्था की जा रही है। घाटमपुर, बेनजीर, बजावाला, इमरता, खेमपुर, बिचपुरी, अलियागंज, शौकत नगर, नबीगंज, फैज नगर, घोसीपुरा, नानकार, चंडका, सूपा, भैया नगला, गंगापुर समेत कई इलाकों में काम शुरू किया गया है।



तीन साल पहले गांधी समाधि तक आ गई थी बाढ़

कोसी नदी में आई बाढ़ ने 2021 में सारे रिकाॅर्ड तोड़ दिए थे। पहली बार शहर में गांधी समाधि तक बाढ़ का पानी पहुंच गया था। पानी के बहाव में श्री हरि इंटर काॅलेज की रोड भी कट गई थी। घाटमपुर, बेनजीर, प्रानपुर रोड भी बाढ़ के पानी में डूब गया था। वहीं 2010 में कोसी नदी में 1.20 लाख क्यूसेक पानी छोड़ने पर घाटमपुर डूब गया था। दिल्ली-लखनऊ हाईवे पानी के कारण आठ दिन बंद रहा था।


बाढ़ से निपटने के लिए प्रशासन की ओर से भरपूर इंतजाम किए जा रहे हैं। बाढ़ नियंत्रण के लिए प्लान तैयार कर लिया गया है। सभी संबंधित अफसरों को बाढ़ की आशंका को देखते हुए तैयारियों में जुटने को कहा है। प्रशासन बाढ़ से निपटने में पूरी तरह सक्षम है। - जोगिंदर सिंह, जिलाधिकारी

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बाढ़ नियंत्रण के लिए अभी से तैयारियां शुरू कर दी गई है। चुनाव के बाद अधिक समय नहीं रह जाएगा। ऐसे में अभी से धीरे-धीरे इंतजाम कर रहे हैं। अभी जिन क्षेत्रों में बाढ़ की आशंका अधिक रहती है वहां पर होल्डर स्टड और बोल्डर एफऑन लगाए जा रहे हैं। ताकि कभी बाढ़ आए तो यह पानी को रोक सकें। - सियाराम, एक्सईएन, सिंचाई विभाग, रामपुर
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