महिला अस्पताल में प्रसव के दौरान नवजात की गर्दन कटने के मामले में जेल में बंद महिला अस्पताल की संविदा डॉक्टर तैयबा प्रसव कराने के लिए काबिल ही नहीं है। वो तो सहायक के तौर पर काम कर सकती हैं। ये खुलासा सीएमओ ने कोर्ट को भेजी अपनी रिपोर्ट में किया है।
सीएमओ की इस रिपोर्ट के बाद महिला अस्पताल के कामकाज पर फिर सवाल खड़ा हो गया है। इससे साफ जाहिर होता है कि अस्पताल में मरीजों की जिंदगी से किस तरह खिलवाड़ किया जा रहा है। यदि डॉ. तैयबा प्रसव कराने के लिए काबिल नहीं है तो उस दिन प्रसव कैसे करा रही थीं।
जिला अस्पताल में भी मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है। यहां पर जिस डाक्टर के भरोसे मरीज की जान है, वो तो इलाज करने योग्य भी नहीं है। ऐसा खुलासा सीएमओ की ओर से कोर्ट को भेजी गई रिपोर्ट में हुआ है। महिला अस्पताल में पिछले माह प्रसव के दौरान नवजात की गर्दन कटने से मौत हो गई थी।
परिजनों ने आरोप लगाया था कि डाक्टर ने अमानवीय तरीके से प्रसव कराया था। नवजात के कमर में कमरबंद बांधकर खींचा गया था। इससे नवजात का धड़ तो बाहर आ गया, लेकिन सिर गर्भ में फंस गया। मामले में डॉ. तैयबा और नर्स माधुरी सिंह को आरोपी बनाया गया था। डॉक्टर इस वक्त जेल में हैं, जबकि माधुरी को जमानत मिल चुकी है।
जेल में बंद डॉक्टर ने जमानत के लिए सेशन कोर्ट में अर्जी डाली थी। कोर्ट ने सीएमओ से रिपोर्ट तलब की थी। कोर्ट के आदेश पर सीएमओ ने जो रिपोर्ट भेजी है वो चौकाने वाली है। रिपोर्ट के मुताबिक डॉ. तैयबा प्रसव कराने के योग्य ही नहीं है।
वो बतौर सहायक के रूप में ही कार्य कर सकती हैं। सीएमओ की इस रिपोर्ट के बाद महिला अस्पताल के कामकाज पर भी सवाल उठने लगा है। इस रिपोर्ट से साफ हो गया है कि महिला अस्पताल में मरीजों की जिंदगी से किस तरह खिलवाड़ किया जा रहा है।
महिला अस्पताल की डॉ. तैयबा की जमानत अर्जी पर सेशन कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई पूरी हो गई। कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुरक्षित कर लिया है। इससे पहले अभियोजन की ओर से सीएमओ की ओर से भेजी गई रिपोर्ट को भी पेश किया गया।