रामपुर। गर्मी के मौसम में लावारिस कुत्तों का आतंक जिले में लगातार बढ़ रहा है। मार्च से मई के बीच जिले में नौ हजार से अधिक लोगों को कुत्तों ने काटा है। हालात यह हैं कि बच्चे स्कूल जाने से डर रहे हैं और महिलाएं घर से बाहर निकलने में हिचकिचा रही हैं, लेकिन नगर पालिका की व्यवस्था अब तक प्रभावी नहीं हो सकी है।
इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि खतरनाक और बीमार कुत्तों को इंजेक्शन लगाकर मारा जा सकता है। पालिका के पास खूंखार कुत्तों को चिह्नित करने का कोई इंतजाम नहीं है। एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) सेंटर भी शुरू नहीं हो पाया है, जबकि इसके निर्माण पर करीब पांच लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
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44 लाख रुपये का टेंडर अब तक अधर में
करीब छह महीने पहले नगर पालिका ने मैसर्स श्याम हेल्पिंग इनसाइज को 44 लाख रुपये का टेंडर दिया था, लेकिन अब तक कुत्ते पकड़ने का काम शुरू नहीं हो सका है। अधिकारियों का कहना है कि प्रस्ताव को बोर्ड में रखा जाएगा और स्वीकृति मिलने के बाद कार्रवाई शुरू की जाएगी।
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इन क्षेत्रों में ज्यादा दहशत
जिले के विभिन्न क्षेत्रों में कुत्तों के हमले नियंत्रण से बाहर होते जा रहे हैं। मोहल्ला शाहबाद गेट, तीतरवाली पाकड़, घेर मियां खां, घेर सलामत खां, सिविल लाइंस, बमनपुरी, मंगल की पैठ और चपटा कॉलोनी में कुत्ते झुंड में घूम रहे हैं और गाड़ियों के नीचे दुबककर राहगीरों पर हमला कर रहे हैं।
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अस्पताल से मिले आंकड़ों के अनुसार यहां इतने लोगों को कुत्ताें ने काटा-
रामपुर – 2,200 लोगों को
टांडा – 2,108
बिलासपुर – 1,733
मिलक – 1,800
शाहबाद – 1,167
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वर्जन-
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन किया जाएगा। अब ऐसे कुत्तों को चिह्नित किया जाएगा और इसके बाद पशु चिकित्सक के साथ बातचीत करने के बाद कार्रवाई की जाएगी। -दुर्गेश्वर त्रिपाठी, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका, रामपुर