रामपुर। डॉ. नैपाल सिंह ने साल 2014 के लोकसभा चुनावों में सपा के नसीर अहमद खां को 23,435 वोटों से मात देकर चुनाव में जीत दर्ज की थी। इस चुनाव की मतगणना में शुरुआत से सपा के नसीर अहमद खां ही आगे रहे, लेकिन मतगणना के अंतिम चार चक्रों में डॉ. नैपाल सिंह ने न सिर्फ अपने वोटों के अंतर को पूरा किया बल्कि जीत भी दर्ज की।
साल 2014 में रामपुर के लोकसभा चुनावों पर पूरे प्रदेश और दिल्ली तक की नजरें लगे हुई थीं। वजह थी उस समय प्रदेश में सपा की सरकार और रामपुर में उस वक्त सपा सरकार में कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खां के करीबी नसीर अहमद खां का सपा से लोकसभा प्रत्याशी होना। जब मतगणना शुरू हुई तो सपा प्रत्याशी नसीर अहमद खां ने शुरुआत से ही बढ़त बनानी शुरू कर दी। कुल 25 चक्रों में हुई मतगणना में नसीर अहमद खां 21 चक्रों की मतगणना तक आगे रहे। पहले चक्र में 349 वोट की मामूली बढ़त हासिल करने वाले सपा के नसीर अहमद खां 13वें राउंड लगातार इस आंकड़े को बढ़ाते रहे और करीब 37 हजार से अधिक की बढ़त बना ली थी। इसके बाद 14वें चक्र से भाजपा के डा. नैपाल सिंह ने इस बढ़त को कम करना शुरू किया था। इसके बाद 22वें चक्र की मतगणना के बाद से जीतने वाले प्रत्याशी की तस्वीर ही बदल गई। 22वें चक्र में डा. नैपाल सिंह ने सपा प्रत्याशी को पीछे छोड़ते हुए करीब सात हजार से अधिक वोट से बढ़त बना ली, जोकि आखिरी 25वें चक्र तक बरकरार रही और डॉ. नैपाल सिंह ने 23435 मतों से जीत दर्ज की।
बिना किसी स्टार प्रचारक के सिर्फ मोदी लहर में रामपुर में 16 साल बाद जीती थी भाजपा
रामपुर। डॉ. नैपाल सिंह ने साल 2014 के लोकसभा चुनावों में न सिर्फ जीत दर्ज की बल्कि रामपुर लोकसभा चुनाव में 16 साल के जीत के सूखे को भी खत्म किया। साल 1998 में मुख्तार अब्बास नकवी ने रामपुर लोकसभा से जीत दर्ज की थी। रामपुर में पहली बार भाजपा ने मुस्लिम चेहरे पर दांव खेला था और नकवी इस विश्वास पर खरे उतरे थे। इसके बाद 13 महीने तक रही भाजपा सरकार में मुख्तार अब्बास नकवी को भी इस जीत का इनाम मिला था और उन्हें सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री बनाया गया था। इसके बाद 1999 में कांग्रेस से बेगम नूरबानो ने जीत दर्ज की और फिर 2004 व 2009 में लगातार दो बार जयाप्रदा नाहटा सांसद रहीं। 2014 में जयाप्रदा ने बिजनौर से चुनाव लड़ा और रामपुर में डॉ. नैपाल सिंह ने भाजपा की जीत का परचम लहराया था।
इस चुनाव में अन्य चुनावों की तरह बड़े स्टार प्रचारकों की जनसभा या रोड शो नहीं हुऐ थे। इसके बावजूद डॉ. नैपाल सिंह ने मोदी लहर और लोधी-राजपूत वोट बैंक में मजबूत पकड़ के चलते जीत दर्ज की थी। डॉ. नैपाल सिंह इस चुनाव में स्वार-टांडा, चमरौआ और नगर विधानसभा क्षेत्र की मतगणना में पीछे रहे लेकिन, मिलक और बिलासपुर विधानसभा के मतदाताओं ने जमकर वोट दिए। जिससे न सिर्फ उन्होंने नसीर अहमद खां की बढ़त को कम किया बल्कि उनसे बढ़त भी बना ली। जिसकी वजह से करीब 37 हजार वोटों से पिछड़ रहे डॉ. नैपाल सिंह 23 हजार से अधिक वोटों से जीत गए थे।