रामपुर। रमजान माह के पहले जुमे पर जामा मस्जिद में नमाज अदा कराने से पहले शहर काजी खुशनूद मियां ने रोजे के बारे में तफसील से बताया। उन्होंने कहा कि हर बुद्धिमान, परिपक्व पर रमजान के एक महीने का रोजा रखना फर्ज हैं।
उन्होंने कहा कि अगर कोई बीमार है तो किसी माहिर डॉक्टर से राय मशवरा करें तब ही रोजा छोड़ सकते हैं, ऐसे रोजा नहीं छोड़ सकते। क्योंकि डॉक्टर ही जानते हैं कि कब बीमारी बढ़ सकती है और कब नही। कहा कि अगर किसी में बीमारी के लक्ष्ण नहीं है और बिना अनुभव के डॉक्टर ने उसे बताया और उसने रोजा तोड़ दिया तो कफ़्फ़ारा देना जरूरी होगा और अगर रोजा नहीं रखा तो गुनाह रहेगा। उन्होंने कहा कि रोजा इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है। साल भर में एक महीने के रोजे रखना अनिवार्य है।