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Rampur News: ट्रेनों की देरी और भीड़ से यात्रियों की बढ़ी परेशानी

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गेट तक लटके रहे यात्री, गर्मी और उमस के बीच सफर बना चुनौती
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संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर। गर्मी और उमस के बीच ट्रेनों में सफर करना यात्रियों के लिए मुश्किल होता जा रहा है। एक ओर ट्रेनों की देरी से लंबा इंतजार करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर ट्रेनों में भीड़ के कारण सीट और जगह पाने के लिए यात्रियों को जद्दोजहद करनी पड़ रही है। रविवार को रामपुर से गुजरने वाली ट्रेनों में यात्री गेट तक लटके नजर आए। कई यात्रियों को ट्रेन में चढ़ने के लिए धक्कामुक्की और नोकझोंक का सामना करना पड़ा।
रविवार को चिलचिलाती धूप और गर्मी के बीच ट्रेनों का इंतजार करते हुए यात्रियों के पसीने छूट गए। आमतौर पर दोपहर में अवध असम एक्सप्रेस के गुजरने के बाद स्टेशन पर ज्यादा यात्री दिखाई नहीं देते, लेकिन ट्रेनों की देरी के कारण बड़ी संख्या में यात्री स्टेशन पर इंतजार करते रहे।
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सुबह अप लाइन की कई ट्रेनें काफी देरी से चलीं। काशी विश्वनाथ, दून एक्सप्रेस, पद्मावत एक्सप्रेस, नौचंदी एक्सप्रेस और अवध असम एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनें विलंब से स्टेशन पहुंचीं। इससे यात्रियों का सब्र जवाब देता नजर आया। कई यात्रियों ने रोडवेज बसों का सहारा लिया, जबकि कई लोग ट्रेनों से ही यात्रा करने को मजबूर रहे।
दोपहर में डाउन लाइन की अवध असम एक्सप्रेस दो घंटे से अधिक देरी से स्टेशन पहुंची। ट्रेन के गेट तक यात्री लटके हुए थे। स्टेशन पर इंतजार कर रहे कई यात्रियों की उसमें चढ़ने की हिम्मत नहीं हुई, जबकि कुछ यात्री प्रवेश द्वार पकड़कर लटक गए। ट्रेन चलने पर जब अंदर खड़े यात्रियों ने आगे बढ़कर जगह नहीं दी तो कई लोगों को सुरक्षा के मद्देनजर स्टेशन पर ही उतरना पड़ा।
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ट्रेन के भीतर पांव रखने तक की जगह नहीं थी। भीड़ और उमस के बीच कई यात्री हाथ से पंखा झलते नजर आए। अन्य ट्रेनों में भी कमोबेश यही स्थिति देखने को मिली।
देरी से पहुंचीं यह ट्रेनें
ट्रेन देरी
काशी विश्वनाथ दो घंटे
दून एक्सप्रेस 41 मिनट
पद्मावत एक्सप्रेस एक घंटा 13 मिनट
नौचंदी एक्सप्रेस एक घंटा 46 मिनट
सत्याग्रह एक्सप्रेस पांच घंटे 19 मिनट
शहीद एक्सप्रेस एक घंटा 2 मिनट
बाघ एक्सप्रेस एक घंटा 15 मिनट
अवध असम दो घंटा 10 मिनट
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वर्जन
आमतौर पर ट्रेनें नियमित समय पर आती हैं। कई बार किसी ट्रेन को पास कराने के कारण देरी हो जाती है। कई ट्रेनों में यात्री काफी अधिक हो जाते हैं, ऐसे में जगह मिल पाना मुश्किल हो जाता है। -मो. आजम, स्टेशन अधीक्षक, रेलवे स्टेशन
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