पुलिस आंख बंदकर लोगों को गुंडा बताने पर तुली है। शरीफ लोगों को भी गुंडा एक्ट में निरुद्ध किया जा रहा है। प्रशासन की रिपोर्ट तो कुछ ऐसा ही खुलासा कर रही है। प्रशासन की माने तो पुलिस नियमों को दरकिनार कर मामूली झगड़ों के आरोपियों पर भी गुंडा एक्ट लगा देती है। बाद में जब जांच होती है को ऐसे लोगों को ‘शरीफ’ घोषित कर दिया जाता है। शासन की मंशा है कि अपराधियों पर नकेल कसी जाए और उनको जेल की सलाखों के पीछे डाला जाए।
इस फेर में पुलिस आंख बंद कर लोगों को गुंडा बनाने की कार्रवाई कर रही है। महज एक या दो मुकदमों के आधार पर ही आरोपी के खिलाफ गुंडा एक्ट की सिफारिश की जा रही है। नियमानुसार किसी भी अपराधी पर गुंडा एक्ट लगाने के लिए उसके खिलाफ पुलिस के रिकार्ड में गंभीर प्रकृति के अपराधों का दर्ज होना जरूरी होता है। पुलिस नियम कायदों को दरकिनार कर आपसी झगड़े में शामिल लोगों पर भी गुंडा एक्ट लगा रही है।
पुलिस एसपी के माध्यम से डीएम के गुंडा एक्ट लगाने की सिफारिश करते हुए उसे जिला बदर करने की सिफारिश करती है। पुलिस की रिपोर्ट में ही कई दफा झोल होता है। साल भर के आंकड़ों पर गौर फरमाया जाए तो जिले के विभिन्न थानों की पुलिस ने 140 अपराधियों के खिलाफ गुंडा एक्ट लगाने की सिफारिश की। डीएम कोर्ट में शुरू हुई तो सामने आया कि पुलिस ने मामूली झगड़ों में शामिल आरोपियों पर भी गुंडा एक्ट लगाने की सिफारिश कर दी है। डीएम कोर्ट ने पुलिस की रिपोर्ट को खारिज कर दिया।
जिस किसी भी शख्स से लोगों को भय और उपस्थिति से क्षेत्र विशेष में लोगों को गंभीर अपराध की आशंका पैदा हो जाती है, उस पर गुंडा एक्ट लगाया जा सकता है। जिन आरोपियों पर गुंडा एक्ट लगाने का औचित्य साबित हो जाता है उनको प्रशासन की ओर से गुंडा मान लिया जाता है। उन्हें छह माह के लिए जिले की सीमा से बाहर कर दिया जाता है। यदि इस बीच वो जिले की सीमा में घुसता है तो उसके खिलाफ पुलिस कार्रवाई कर सकती है और जेल भेजे जाने तक का अधिकार पुलिस को है। डीएम का फैसला यदि आरोपी को संतोषजनक नहीं लगता है तो वो इस फैसले के खिलाफ कमिश्नरी में अपना पक्ष रख सकता है।
स्वार पुलिस ने तो हद ही कर दी। पुलिस ने मृत व्यक्ति पर भी गुंडा एक्ट लगा दिया। स्वार पुलिस ने जनवरी में कस्बा निवासी जुबैर नाम के व्यक्ति पर गुंडा एक्ट लगाने की सिफारिश करते हुए रिपोर्ट डीएम कोर्ट को भेज दी। डीएम कोर्ट से संबंधित आरोपी को नोटिस जारी किया गया। जो रिपोर्ट आई उसके मुताबिक उक्त नाम के व्यक्ति की मौत काफी समय पहले हो चुकी थी। नोटिस के जवाब में उक्त व्यक्ति का मृत्यु प्रमाणपत्र भी भेज दिया। बाद में इस नोटिस को निरस्त कर दिया गया।
खजुरिया पुलिस ने भी कुछ माह पहले 60 साल के बुजुर्ग रहमत पर भी गुंडा एक्ट लगाने की सिफारिश की थी। उसके खिलाफ मारपीट का मुकदमा दर्ज किया गया था। कोर्ट ने जब रिपोर्ट मंगवाई गई तो पता चला कि उसके खिलाफ सिर्फ दो पक्षों में झगड़े का मामला था। डीएम कोर्ट से जब अभियोजन की ओर से परीक्षण कराया गया तो स्थिति सामने आ गई। बाद में डीएम कोर्ट ने पुलिस की रिपोर्ट को खारिज कर दिया।