एसओजी और पुलिस की टीम ने गुरुवार को प्रधान पद की प्रत्याशी के ससुर के अपहरण मामले का खुलासा कर दिया है। टीम ने गांव के पास से ही अपहृत को नाटकीय ढंग से जंजीरों में बंधा हुआ बरामद कर लिया है। पुलिस ने बताया कि पीतांबर ने दूसरे प्रत्याशी के परिजनों को फंसाने के लिए अपहरण का नाटक कर रचा था।
उसका अपहरण नहीं किया गया था। बाद में उसे जेल भेजा दिया गया। ग्राम पंचायत पिपलाशिवनगर के प्रधान पद की प्रत्याशी सुनीता के ससुर पीतांबर सिंह का सोमवार को जनसंपर्क के दौरान अपहरण हो गया था। परिवार वालों ने मंगलवार को कोतवाली पहुंचकर प्रधान पद की दूसरे प्रत्याशी के पति समेत चार लोगों के खिलाफ अपहरण की तहरीर दी थी।
साथ ही परिजनों ने एसपी दफ्तर पर बरामदगी के लिए प्रदर्शन भी किया था। पुलिस ने मामले में बुधवार की रात सतपाल, दयाशंकर, हरीश चंद्र और देवीदास के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। उधर, एसओजी और पुलिस की टीम पीतांबर की बरामदगी को लेकर जांच में लगी हुई।
टीम को गुरुवार की सुबह सूचना मिली कि पीतांबर गांव में आंगनबाड़ी केंद्र के पास जंजीरों में ताले के साथ पड़ा है। इस पर पुलिस मौके पहुंच कर उसे बरामद कर लिया। इसके बाद उसे कोतवाली ले लाई। एसओजी और पुलिस की टीम ने पूछताछ शुरू की। पुलिस पूछताछ के दौरान पीतांबर के सच कबूल करने का दावा कर रही है।
पुलिस के अनुसार पीतांबर का किसी ने अपहरण नहीं किया था, बल्कि वह 23 नवंबर की रात मिलक से पैसेंजर ट्रेन से हापुड़ गया। यहां पहुंचने के बाद वह इधर-उधर टहलता रहा। 24 नवंबर को वह मेरठ पहुंच गया, जहां उसने मेला देखा। यहां से उसने चालीस रुपये में जंरीर और ताले खरीदे।
साथ ही उसने अपने अपहरण की बात परिवार के लोगों को बताई। वह बुधवार की रात को बस से आया और सुबह गांव के पास हाथ-पैरों में जंजीर में ताला लगाकर बैठ गया। इस बीच परिवार वालों से उसकी फोन पर बात भी हुई थी। पुलिस ने ग्रामीणों और मीडिया के सामने उसको पेश किया, जिसने अपने अपहरण की बात को पूरी तरह से खारिज कर दिया।
एसओजी प्रभारी गीतेश कपिल ने बताया पीतांबर ने प्रधान पद की प्रत्याशी के पति सत्यपाल को फंसाने के लिए साजिश रची थी और वह चाहता था कि उसका पति समेत चारों जेल चलें जाएं और वह चुनाव जीत जाए। पुलिस ने बरामद पीतांबर को चुनाव में झगड़े की आशंका में एसडीएम अली हसनकर्नी के यहां पेश किया। उसको जेल भेज दिया।