सरकारी जमीन को फर्जी तरीके से अपना बताकर हाईकोर्ट से स्थगनादेश प्राप्त कर लेने के मामले में तत्कालीन लेखपाल समेत नौ लोग फंस गए हैं। सभी के खिलाफ धोखाधड़ी कर सरकारी जमीन कब्जाने की रिपोर्ट दर्ज कर की गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। सरकारी जमीनों के रिकार्ड में अफसरों और कर्मियों से साठगांठ कर कुछ लोगों ने हेराफेरी कर इसे निजी जमीन में दर्ज करा लिया था।
डूंगरपुर में भी ऐसा हुआ। कुछ लोगों ने सरकारी जमीन को अपना बताया और प्लाटिंग कर इसे बेच दिया। जब विभाग को इस जमीन की याद आई तो पता चला कि इस पर कब्जा हो चुका है। आसरा आवास के लिए उक्त जमीन को खाली कराने का काम शुरू हुआ तो कुछ लोग हाईकोर्ट चले गए। हाईकोर्ट ने इस मामले में स्थगनादेश भी दे दिया था।
प्रशासन की ओर से सरकारी जमीन के रिकार्ड में हेराफेरी के मामले की जांच की गई तो घपले की पुष्टि हुई। जांच अभी कराई जा रही है। फिलहाल सीडीओ के नेतृत्व में गठित कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर डूंगरपुर के एक ही परिवार के आठ लोगों और तत्कालीन लेखपाल के खिलाफ रिकार्ड रूम के प्रभारी सीपी सिंह की ओर से सिविल लाइंस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
मामले में रहमत अली, सज्जाद अली, मुर्शरफ, अशरफ, इमरान, इकराम, इरफान और जुबैदा बेगम के साथ ही तत्कालीन लेखपाल को आरोपी बनाया गया है। इन लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी कर रिकार्ड में हेराफेरी करने और फर्जी कागजातों के आधार पर स्टे लाने का आरोप लगाया गया है।