दिल्ली के निर्भया कांड के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पब्लिक ट्रांसपोर्ट में महिलाओं की सुरक्षा के लिए जो निर्देश जारी किए थे, उसका पालन नहीं हो रहा है। दिल्ली की घटना के बाद कोर्ट ने आदेश दिया था कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट के चालकों का पुलिस वैरीफिकेशन होना चाहिए। चालकों का रिकार्ड पुलिस के पास होना चाहिए। रात में पब्लिक ट्रांसपोर्ट की लाइट ऑफ नहीं होगी। किसी भी नियम का पालन नहीं हो रहा है।
बरेली के शीशगढ़ की घटना ने एक बार फिर से दिल्ली की निर्भया कांड की याद दिला दी है। निजी बस के चालक और परिचालक ने महिला की अस्मत लूट की। छीनाझपटी में उसके 14 दिन के बच्चे की भी मौत हो गई। इस घटना का एर कारण पब्लिक ट्रांसपोर्ट में महिला यात्रियों के लिए सुरक्षा के जो निर्देश दिए गए हैं, उनका पालन न होना भी है। निर्देश हैं कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर चालक का नाम और लाइसेंस नंबर अंकित होना चाहिए।
वाहन के अंदर भी नंबर होना चाहिए। महिला हेल्पलाइन का नंबर भी अंकित होना चाहिए। ये नियम बस, आटो और टैक्सी चालकों पर लागू होता है। रामपुर में निजी बस चालकों और परिचालकों का रिकार्ड पुलिस के पास मौजूद नहीं है। निजी बसों में मालिक किसी को परिचालक बना देते हैं। एआरटीओ (प्रवर्तन) कौशलेंद्र प्रताप यादव ने बताया कि रामपुर में जितने भी आटो चालक हैं उनको पहचान पत्र जारी किया गया है।
चालकों को पहचान-पत्र गले में टांगकर आटो चलाने के निर्देश हैं, जो यूनियन की ओर से जारी किया गया है। इस पर एआरटीओ के भी हस्ताक्षर होते हैं। आटो के अंदर उसका नंबर और महिला हेल्पलाइन का नंबर भी अंकित कराया गया है। निजी बस चालकों के मामले में एआरटीओ ने कहा कि रामपुर में तो पहचान पत्र जारी किया गया है। वैरीफिकेशन ड्राइविंग लाइसेंस देते वक्त होता है।