सीआरपीएफ आतंकी हमले के सात साल पुराने केस में गवाहों की फेहरिस्त छोटी हो गई है। सात साल में सिर्फ 33 लोगों की गवाही होने के बाद अब अभियोजन पक्ष ने गवाहों की फेहरिस्त छोटी करते हुए चार और नामों की सूची सौंपते हुए गवाही कराने की बात कही है। अब मामले की सुनवाई रोजाना होगी।
उम्मीद जताई जा रही है कि इस केस का फैसला बहुत ही जल्द आ सकता है। सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर पर 31 दिसंबर 2007 को आधी रात के बाद आतंकी हमला हुआ था। इसमें सात जवान शहीद हो गए थे, जबकि एक रिक्शा चालक की मौत हो गई थी।
इस घटना में पुलिस और एटीएस ने दो पाकिस्तानी समेत सात आतंकियों को गिरफ्तार करते हुए जेल भेज दिया था। सात साल से ये मुकदमा सेशन कोर्ट में चल रहा है। मामले की विवेचना के बाद विवेचकों ने करीब डेढ़ सौ लोगों को इस मामले का गवाह बनाया था।
अभियोजन पक्ष की लचर पैरवी के चलते सात साल में सिर्फ 33 गवाहों को ही पेश किया जा सका। अभियोजन की सुस्त पैरवी पर कोर्ट ने भी नाराजगी जाहिर की थी। कोर्ट ने अभियोजन से इस मामले में तेजी से पैरवी करने के आदेश दिए थे।
साथ ही डीएम-एसपी समेत अन्य अफसरों को पत्र लिखकर गवाहों को कोर्ट में पेश करने के आदेश दिए थे। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि इस प्रकरण के साथ ही अन्य मुकदमे भी होते हैं, लिहाजा सीआरपीएफ हमले की सुनवाई हाईकोर्ट के आदेश के अनुपलान में लंच के बाद रोजाना की जाएगी।
इसके बाद अभियोजन की ओर से अब चार गवाहों की सूची कोर्ट में सौंपी गई है। सिर्फ इन्ही लोगों की गवाही होनी शेष बताई गई है। शुरुआत में पुलिस ने डेढ़ सौ ज्यादा लोगों को गवाह बनाने की बात कही थी। कोर्ट की फटकार के बाद अभियोजन पक्ष ने तेजी दिखानी शुरू कर दी है। उम्मीद जगी है कि जल्द ही इस मामले का फैसला आ सकता है।
न्यायिक अधिकारी के अवकाश पर होने की वजह से मंगलवार को इस मामले की सुनवाई नही हो सकी। हालांकि इस मामले के गवाह ब्लास्टिक एक्सर्ट संजय खरे कोर्ट में पहुंचे थे, लेकिन उनकी गवाही नहीं हो सकी। अब उनकी गवाही बुधवार को होगी।
लखनऊ जेल मे बंद पाक आतंकियों के पूरे केस को लखनऊ स्थानांतरित करने के लिए लखनऊ कारागार के अधीक्षक की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसी पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने आदेश दिया था कि सीआरपीएफ हमले के मामले की सुनवाई प्रतिदिन की जाए। तीन माह के भीतर इसका निस्तारण किया जाए।