पठानकोट के एयरबेस पर हुए हमले के बाद पुलिस ने आरोपियों की पेशी के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरती। सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर पर हमले के आरोपियों की पेशी के दौरान कड़े सुरक्षा इंतजाम रहे। हाईवे से लेकर अदालत परिसर तक पुलिस तैनात रही।
गौरतलब है कि सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर पर हमला करने के आरोपियों को पेशी पर यहां बरेली और लखनऊ से लाया जाता है। पेशी पर पुलिस उनको यहां लेकर आती है फिर बरेली और लखनऊ ले जाती है। रास्ते में हर थाने की पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराती है।
रामपुर जिले की पुलिस बरेली की सीमा से आतंकियों को कड़ी सुरक्षा के बीच यहां लेकर आती है। रास्ते में मिलक, शहजादनगर और सिविल लाइंस कोतवाली की पुलिस ने सुरक्षा उपलब्ध कराती है। मंगलवार को आरोपियों की पेशी थी। पठानकोट हमले के मद्देनजर पूरे जनपद में अलर्ट है।
पुलिस ने आरोपियों की पेशी के दौरान अतिरिक्त सुरक्षा की व्यवस्था की थी। हाईवे से लेकर अदालत परिसर तक पुलिस की तैनाती थी। अदालत परिसर के गेट पर आने-जाने वालों की सघन तलाशी हुई। अदालत परिसर में कई थानों की पुलिस मौजूद रही।
सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर पर हमला करने के आरोपियों को जिला कारागार में रखने से यहां के अधिकारी पहले ही हाथ खड़े कर चुके हैं। सुरक्षा व्यवस्था और हाई सिक्योरिटी वाले बैरक नहीं होने का हवाला देकर जिला कारागार के अधिकारियों ने इन आठ आरोपियों को यहां रखने से इंकार किया था।
कुछ दिनों तक आरोपियों को पेशी से एक दिन पहले रामपुर लाया जाता था और जिला कारागार में रखा जाता था। बाद में जिला कारागार के अधिकारियों ने उनको एक रात रखने से भी इंकार कर दिया। इसके बाद आरोपियों को बरेली सेंट्रल जेल भेज दिया गया था। तीन आरोपियों को लखनऊ जेल में रखा गया है।
हर पेशी पर आरोपियों को लखनऊ और बरेली से रामपुर लाया जाता है। सीआरपीएफ हमले के आरोपियों की पेशी के दौरान कई बार पुलिस को धमकी भी मिल चुकी है। 2012 में भी धमकी मिली थी। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों की पेशी के दौरान अदालत परिसर में रूफ टाप ड्यूटी लगाई थी।
उस वक्त के तत्कालीन एसपी भानु भास्कर ने इस मामले की सुनवाई लखनऊ में किए जाने की सिफारिश की थी, लेकिन उस पर कोई फैसला नहीं लिया जा सका।