महिला कर्मचारी और सीडीओ प्रकरण में जांच-पड़ताल अटक गई है। महिला कर्मचारी द्वारा अविश्वास व्यक्त करने के बाद जिलाधिकारी की ओर से गठित जांच समिति ने जांच करने से इनकार कर दिया। अब यह प्रकरण एक बार फिर अनुसूचित जाति जनजाति आयोग के लिए संदर्भित किया जा रहा है। इस संबंध में जिलाधिकारी ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। आयोग में 13 मई को इस प्रकरण पर सुनवाई होनी है। संविदा के आधार पर जतिला कंसलटेंट के पद पर तैनात महिला कर्मचारी और मुख्य विकास अधिकारी के बीच फोन पर हुए वार्तालाप की कॉल रिकार्डिंग वायरल हुई है।
इसमें महिला कर्मचारी ने सीडीओ पर शोषण करने के आरोप लगाए हैं। मामले में सीडीओ कह चुके हैं कि आवाज उनकी नहीं है। उन्हें फंसाया गया है। महिला कर्मचारी ने अपनी शिकायत अनुसूचित जाति आयोग के पास भेजी थी। आयोग के सचिव ने जांच के लिए यह प्रकरण जिलाधिकारी को संदर्भित किया था। साथ ही 13 मई तक आख्या मांगी है। आयोग के निर्देश पर जिलाधिकारी ने एडीएम बीएन यादव की अध्यक्षता में जांच समिति का गठन किया।
समिति में महिला अधिकारी होने के नाते एआरटीओ छवि सिंह चौहान और जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी जगदीश सिंह को अनुसूचित जाति का प्रतिनिधि बनाकर शामिल किया गया। समिति के सदस्यों ने दो दिन तक लगातार जांच-पड़ताल की। सात अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए, लेकिन जब शिकायतकर्ता महिला कर्मचारी बयान देने आते तो उसने जांच टीम पर ही अविश्वास व्यक्त कर दिया। महिला का कहना था कि उसे इस समिति से न्याय की उम्मीद नहीं है। इस पर समिति के सदस्यों और अध्यक्ष ने डीएम को अवगत कराया।
लिखित रूप से कहा कि अब यह समिति इस प्रकरण में जांच नहीं कर पाएगी। जिलाधिकारी ने अब इस संबंध में अनुसूचित जाति आयोग को वस्तु स्थिति से अवगत कराने का निर्णय लिया है।