रामपुर बुशहर। सीटू की राष्ट्रीय और राज्य कमेटी के आह्वान पर वीरवार को सीटू संबंधित सभी यूनियनों ने प्रतिनिधिमंडल के माध्यम से प्रबंधन के माध्यम से 4 मजदूर विरोधी काले कोडों, 3 किसान विरोधी काले कानूनों और बिजली विधेयक को वापस लेने की मांग की। इसके अलावा मजदूरों की 16 मांगों के संदर्भ में सभी मजदूरों के हस्ताक्षर के साथ एक ज्ञापन प्रधानमंत्री को भेजा गया।
इसके तहत सीटू क्षेत्रीय समन्वय कमेटी ने तहसीलदार रामपुर के माध्यम से मजदूरों की मांगों को लेकर 16 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन प्रधानमंत्री को भेजा। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार मजदूर, किसान विरोधी निर्णय ले रही है। 44 श्रम कानूनों को खत्म करके मजदूर विरोधी 4 श्रम संहिताएं बनाना, 3 किसान विरोधी काले कानून इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं। कोरोनाकाल में देश की कुल श्रम शक्ति का 25 प्रतिशत भाग रोजगार से वंचित है। मजदूरों को केंद्र और राज्य की सरकार से कोई आर्थिक मदद नहीं मिल रही।
आपदा का फायदा उठाते हुए मोदी सरकार ने हिमाचल प्रदेश जैसी कई राज्य सरकारों ने आम जनता, मजदूरों और किसानों के लिए आपातकाल को पूंजीपतियों के लिए अवसर में तबदील किया है। ज्ञापन के माध्यम से सीटू ने छह माह के भीतर सभी को मुफ्त वैक्सीन लगाने, अस्पतालों में ऑक्सीजन, बिस्तर और दवाओं सहित स्टाफ की व्यवस्था करने, आयकर मुक्त परिवारों को नकद 7500 रुपये की आर्थिक मदद देने, किसान मजदूर विरोध कानूनों को वापस लेने, मनरेगा में 200 दिन का रोजगार और 300 रुपये दिहाड़ी देने और कोरोना से मौत होने पर पीड़ित परिवार को आपदा राहत कोष से 4 लाख रुपये की आर्थिक मदद देने की मांग की है।
उन्होंने चेताया कि अगर केंद्र और प्रदेश की सरकार मजदूर विरोधी निर्णय लेने से पीछे नहीं हटती है, तो आने वाले समय में मजदूर आंदोलन को औरर तेज किया जाएगा। इस मौके सीटू शिमला जिलाध्यक्ष कुलदीप सिंह, रणजीत ठाकुर, देवेंद्र, राम दास, ललिता और राजू राणा सहित अन्य मौजूद रहे।