रामपुर। मिलक के सिलईबड़ा हुए बवाल के मामले में पुलिस ने एसडीएम और तहसीलदार के हमराह दो होमगार्डों के साथ ही सिलईबड़ा गांव की चौकी के चार पुलिसकर्मियों समेत 25 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। बवाल के दौरान 10वीं के छात्र सुमेश की गोली लगने से मौत हो गई थी। परिजनों का आरोप है कि छात्र की मौत पुलिस की गोली से हुई है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है। सिलईबड़ा गांव में ग्राम समाज की जमीन पर डाॅ. भीमराव आंबेडकर का बोर्ड लगाए जाने को लेकर मंगलवार की शाम को दो पक्षों में बवाल हो गया था। सूचना पर पुलिस भी पहुंच गई थी। बवाल के दौरान हुई फायरिंग में गांव निवासी गेंदनलाल के बेटे सुमेश की गोली लगने से मौत हो गई थी। वहीं दो अन्य लोग घायल हुए थे। ग्रामीणों का आरोप है कि गोली पुलिस की ओर से चलाई गई। घटना के बाद रात भर हंगामा होता रहा। आधी रात के बाद मृतक के पिता गेंदनलाल की तहरीर पर पुलिस ने एसडीएम व तहसीलदार के हमराह दो होमगार्डों, सिलईबड़ा चौकी के प्रभारी दरोगा सुरेंद्र कुमार व तीन अन्य पुलिसकर्मियों समेत 25 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।
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इन पर दर्ज हुआ मुकदमा
एसडीएम मिलक के हमराह होमगार्ड, तहसीलदार के हमराह होमगार्ड, सिलईबड़ा चौकी के प्रभारी सुरेंद्र सिंह, सिपाही आदेश चौहान, वीरेंद्र, मुमतीरीन के अलावा गांव के नत्थूलाल, हेमराज, निर्वेश कुमार, झांजनलाल, तीरथ सिंह, जहोरीलाल, दिनेश कुमार, नौबत राम, हरनंदन, रामप्रकाश, ऊदल, लाल सिंह, बद्री प्रसाद, चरन सिंह, रविंद्र कुमार, राजेंद्र, भूपराम, नरेंद्र, कपिल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई है। आरोपियों के खिलाफ धारा 147, 148, 149, 323 और 302 में मुकदमा दर्ज हुआ है।
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मृतक के पिता बोले, निहत्थे ग्रामीणों पर चलाईं गोलियां
रामपुर। मृतक छात्र सुमेश के पिता गेंदनलाल ने दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर के बोर्ड हटवाने को एसडीएम अमन देओल मय फोर्स के साथ जेसीबी लेकर मंगलवार की शाम को पहुंचे थे, जहां पर लोग बोर्ड हटवाने का विरोध कर रहे थे। विरोध करने वालों में महिलाएं व बच्चे भी शामिल थे। सभी शांतिपूर्ण ढंग से विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। इस बीच एसडीएम के आदेश पर पुलिस ने निहत्थे लोगों पर लाठीचार्ज कर दिया, जिससे अफरातफरी मच गई।
फायरिंग करने वालों में चौकी प्रभारी सुरेंद्र कुमार व चौकी के पुलिस कर्मी, एसडीएम व तहसीलदार के हमराह होमगार्ड समेत 25 लोग शामिल रहे। गोली लगने से उनके बेटे की मौत हो गई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। हालांकि, पीड़ित पक्ष एसडीएम व तहसीलदार को सीधा आरोपी न बनाने से खफा थे। उन्होंने सुबह शव को लेने से इन्कार कर दिया था। उनकी मांग थी कि दोनों का एफआईआर में नाम दर्ज होना चाहिए था। संवाद