रामपुर। यूं तो रामपुर साझी विरासत के शहर के नाम से जाना जाता है। यहां तमाम ऐसी चीजें हैं जो अपनी ऐतिहासिकता के लिए जानी जाती हैं। रजा लाइब्रेरी भी उनमें से एक है। इसकी पांडुलिपियां ऐतिहासिकता को समेटे हुए हैं। इसका संग्रह आज भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। देशभर से लोग यहां के संग्रह का अवलोकन करने के लिए आते हैं। यह लाइब्रेरी 250 साल का इतिहास समेटे हुए है।
रामपुर की रजा लाइब्रेरी ज्ञान का खजाना है। 250 साल पुरानी रामपुर रजा लाइब्रेरी में करीब 60 हजार से ज्यादा पांडुलिपियां संग्रहित हैं। इसके अलावा लघु चित्रों का भी संग्रह है। लाइब्रेरी में जहां भगवान श्री राम से जुड़े संग्रहों का खजाना है, वहीं दूसरी ओर भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े संग्रहों का भी खजाना मौजूद है। लाइब्रेरी में इस वक्त 226 साल पुरानी हस्तलिखित श्रीमद्भागवत कथा भी मौजूद है। रजा लाइब्रेरी से जुड़े अफसर बताते है कि 1798 में केशोराम ब्राह्मण के हाथ से अनुवादित श्रीमद्भागवत गीता का संग्रह आज भी लाइब्रेरी में संग्रहित है। इस संग्रह को पिछले ढाई सौ साल से संग्रहित किया गया है। इसके अलावा यहां भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जुडे़ लघु चित्रों के साथ ही उनकी युवावस्था से जुड़े लघु चित्रों का संग्रह भी मौजूद है। इसके अलावा भगवान श्री कृष्ण से जुड़ीं पांडुलिपियां भी रजा लाइब्रेरी की शान बनी हुई हैं। श्रीमद्भागवत गीता और लघु चित्र लोगों के लिए आकर्षण के केंद्र बने हुए हैं। लाइब्रेरी के किताबी खजाने में 17 हजार पांडुलिपियां और 60 हजार किताबें हैं। इनमें हजरत अली के हाथ से हिरन की खाल पर लिखी कुरआन है तो सुमेर चंद की फारसी में सोने के पानी से लिखी रामायण। इन दुर्लभ पांडुलिपियों को देखने और शोध कार्य के लिए दुनिया भर से लोग यहां आते हैं। इसे एशिया की सबसे बड़ी लाइब्रेरी का दर्जा हासिल है। लाइब्रेरी इस वक्त अपना 250वां स्थापना दिवस मना रहा है।