समाजवादी पार्टी में जो कुछ चल रहा है उससे पार्टी के मुस्लिम चेहरा माने जाने वाले आजम खां खुश नहीं है। अपनी बेबाक टिप्पणी के लिए जाने जाने वाले नगर विकास मंत्री आजम खां का कहना है कि वो नेताजी (मुलायम सिंह यादव) का बहुत सम्मान करते हैं। इसी वजह से चुप हैं। नहीं तो वो भी बोल सकते हैं। अगर वो बोले तो सुना नहीं जाएगा।
आजम खां ने सोमवार को पत्रकारों के सवाल के जवाब में कहा कि कब किसको क्या खतरा है? ये तो वक्त ही बताएगा, लेकिन जो संभावनाएं बताई जा रही हैं, उसमें कुछ चीजें मुझ पर छोड़ दें। मीडिया तय न करे मेरा भविष्य। मुझे क्या करना है, क्या नहीं करना है, ये मुझे तय करने दें।
सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव की ओर से आजम खां के साथ खड़े होने संबंधी बयान पर उन्होंने कहा कि देखिये नेताजी का मैं बहुत सम्मान करता हूं। ये नेताजी का ही सम्मान है, तभी तो हम ये सब कुछ सहन कर रहे हैं। वरना तो हम भी मुंह में जुबां रखते हैं। हमें कहना पड़ा तो सुना नहीं जाएगा।
दादरी के मामले पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की ओर से मीटिंग बुलाए जाने के सवाल पर आजम ने कहा कि दरअसल इन सभी लोगों को ये समझाया गया है कि एजेंडे पर काम करो जो करना है वो करो। बेवजह की बकबक क्यों करते हो? ये बयानबाजी इससे क्या फायदा, जो करना है सो करो, कहो मत।
क्योंकि मीटिंग बाद भी इन लोगों जो बयान दिये उससे यही साबित होता है कि करने पर जोर दिया गया कहने पर नहीं। मुंबई में शिवसेना ने बगैर कहे किया। शिवसेना कहती नहीं है, करती है। आरएसएस कहती नहीं है, करती है। कुछ नेता बहुत बड़बोलापन कर जाते हैं, उससे छवि खराब हो रही है भाजपा की। मीटिंग में उसे बचाने की कोशिश की गई है।