रामपुर। यूक्रेन के उजहोरोद में फंसे रामपुर के आशीष छह दिन बाद आखिरकार अपने परिजनों के बीच घर पहुंच गए। इस बीच उन्हें 16 घंटे तो बस में ही बैठकर गुजारने पड़े। कड़ाके की सर्दी के बीच उन्हें काफी दिक्कतें भी हुईं। वहीं, मुदित राजपूत देर रात तक रामपुर पहुंच सकते हैं।
साईं विहार कॉलोनी निवासी आशीष राजपूत नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी उजहोरोद से एमबीबीएस कर रहे हैं। यह उनका तीसरा साल है। उन्होंने बताया कि भारतीय दूतावास से एडवाइजरी जारी होने के बाद एक मार्च को बस के जरिये हंगरी बॉर्डर के लिए निकल गए। बॉर्डर उनके हॉस्टल से करीब 27 किलोमीटर दूर था। उन्होंने बताया कि उनके हॉस्टल के आसपास तो हालात सामान्य थे। हालांकि अपने दोस्तों से बात करते थे, तो फोन पर धमाकों की आवाज सुनाई पड़ती थी। उन्होंने बताया कि अगले दिन बॉर्डर पार कर लिया। एक दिन तो एक होटल में रुके। इसके बाद दूसरे होटल में चले गए। हमारा नंबर जब आया, तो फ्लाइट के जरिये रामपुर आ गए। उन्होंने बताया कि यहां आने के लिए काफी हंगामा करना पड़ा, जिसके बाद उनका नंबर आया। क्योंकि इंतजार करते हुए काफी दिन हो गए थे। वहीं, खारकीव में फंसे ज्वालानगर रफत कॉलोनी निवासी मुदित राजपूत तमाम दिक्कतों के बाद पोलैंड बॉर्डर तक पहुंचने के बाद स्वदेश लौटने के लिए रवाना हो गए हैं। उनके पिता प्रेम सिंह ने बताया कि संभवत: वे आज देर रात तक रामपुर पहुंच सकते हैं।