कैबिनेट मंत्री आजम खां के खिलाफ लोगों को भड़काने के आरोप में अमिताभ ठाकुर और सामाजिक कार्यकर्ता डा. नूतन ठाकुर पर कोतवाली में आईपीसी की धारा 153 ए तहत रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। दोनों लोगों ने रिपोर्ट को प्राथमिक स्तर पर ही दोषपूर्ण बताया है। साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णयों का हवाला देते हुए एफआईआर रद्द करने की मांग की है। मामले में निलंबित आईपीएस अमिताभ ठाकुर और डा. नूतन ठाकुर ने डीजीपी जावीद अहमद को एक पत्र भेजा है।
इसमें उन्होंने बताया है कि उन पर वाल्मीकि बस्ती के लोगों को मंत्री आजम खां के खिलाफ भड़काने का आरोप है। एफआईआर के तथ्य पूरी तरह गलत हैं, यदि दर्ज रिपोर्ट में कही बातों को सही मान भी लें तो इसमें कोई अपराध नहीं बनता। इसमें मात्र आजम खां के खिलाफ बोले जाने की बात कही गई है। आजम खां एक व्यक्ति हैं, अपने आप में कोई संप्रदाय नहीं, जैसा रिपोर्ट में दावा किया गया है।
अमिताभ ठाकुर और डा. नूतन ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट के बलवंत सिंह, बिलाल अहमद कालू सहित विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए एफआईआर को प्राथमिक स्तर पर ही दोषपूर्ण होने का हवाला देते हुए इसे शीघ्र ही निरस्त करने की मांग की है। गौरतलब है कि अमिताभ ठाकुर अपनी पत्नी नूतन ठाकुर के साथ रविवार 13 मार्च को रामपुर की वाल्मीकि बस्ती गए थे। उन्होंने बस्ती के लोगों से बातचीत भी की थी।
उत्तर प्रदेश वाल्मीकि महासभा के जिला महामंत्री सोनू कठेरिया ने शहर कोतवाली में मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अमिताभ ठाकुर की पत्नी नूतन ठाकुर और आरटीआई कार्यकर्ता दानिश खां उनकी बातों का समर्थन कर रहे थे। पुलिस ने मामले में अमिताभ ठाकुर, नूतन ठाकुर और दानिश खां के खिलाफ सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने के आरोप में आईपीसी की धारा 153-ए के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली थी।