हजरत अबुल फजल अब्बास की याद में अलम मुबारक का जुलूस बरामद हुआ। अंजुमनों ने नोहाख्वानी और अजादारों ने आग पर मातम किया। मजलिस में हजरत अब्बास की शहादत बयान कर आंखों को अश्कवार कर दिया। इमामबाड़ा मिर्जा मो. जफर बेग लाल कबर पर सैयद हसनेन मेरठी ने मजलिस सैयदा शुहदा को खिताब किया।
उन्होंने कहा कि करीब 1400 साल पहले नवासा-ए-रसूल हजरत इमाम हुसैन ने कर्बला में अपनी और असहाब की कुर्बानी देकर इंसानियत को बचाया था। हर इंसान को कभी भी बातिल ताकतों के सामने न झुकने की सीख दी। उन्होंने शहीदे कर्बला हजरत अबुल फजल अब्बास की शहादत बयान कर आंखों को अश्कवार कर दिया।
मजलिस के बाद हजरत अब्बास की याद में कदीमी अलम मुबारक का जुलूस बरामद हुआ। अंजुमन पैगाम वफा के अरशी नकवी ने नजराना अकीदत पेश किया। अंजुमन मासूमिया लोवरपुर स्टेट अंबेडकर नगर के डा. घनश्याम सिंह शर्मा ने बारगाहे हुसैनी में अपना कलाम पढ़कर अजादारों की आंखों में अश्क बहा दिए।
जुलूस में अंजुमन मुहाफिज अजा इलाहाबाद, अंजुमन असगरिया, अजाये हुसैनी अमरोहा, फखरे बनी हाशम नौंगवा सादात, गुलदस्ता हैदरी बरेली, शाने हैदरी कुंदरकी और मुकामी अंजुमनों ने भी नोहाख्वानी की। जुलूस लालकबर, मोती मस्जिद, किला गेट होता हुआ इमाम किला मर्दाना जाकर खत्म हो गया। अजादार ने आग पर भी मातम किया।
इस मौके पर जुल्फिकार जाफर, शबीह जाफर, डा. अजीम नकवी, आदिल हसनेन, वसीम मियां, बाबर रिजवी, यावर रिजवी, अली हैदर जैदी, मुजतबा आबदी, अजहर हसन अब्बास, इरफान जैदी, मिर्जा मुजतबा अली बेग, बासिर हुसैन, जोन जैदी, हसीन जैदी, नसीम जैदी, वसीम हैदर जैदी, मिर्जा ताहिर हुसैन भी थे।