रामपुर। शाहबाद तहसील क्षेत्र के मोहम्मदपुर भौपतपुर गांव में 106 एकड़ भूमि को लेकर चल रहे मामले में एडीएम कोर्ट के आदेश के बाद राजस्व अभिलेखों में बड़ा बदलाव किया गया है। तहसील प्रशासन ने 16 साल बाद न्यायालय के आदेश के अनुपालन में संबंधित 106 एकड़ भूमि को ग्राम समाज की भूमि के रूप में राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कर दिया है।
मोहम्मदपुर भौपतपुर गांव की करीब 106 एकड़ भूमि को लेकर लंबे समय से विवाद की स्थिति बनी हुई थी। भूमि के स्वामित्व और अभिलेखों में दर्ज स्थिति को लेकर मामला उप संचालक चकबंदी कोर्ट तक पहुंचा था। सुनवाई के बाद उप संचालक (चकबंदी)/एडीएम (न्यायिक) जंगबहादुर यादव की कोर्ट ने संबंधित भूमि को ग्राम समाज की भूमि के रूप में दर्ज किए जाने के आदेश दिए थे।
कोर्ट से आदेश मिलने के बाद शाहबाद तहसील प्रशासन ने राजस्व अभिलेखों में आवश्यक संशोधन की कार्रवाई की। इसके तहत करीब 106 एकड़ भूमि को लंबे समय बाद एक बार ग्राम समाज के नाम दर्ज कर दिया गया है। अब राजस्व रिकॉर्ड में यह भूमि ग्राम सभा की संपत्ति के तौर पर दर्ज हो गई है। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद भूमि के अभिलेखों में उसकी स्थिति स्पष्ट हो गई है।
अधिकारियों ने न्यायालय के आदेश के अनुपालन में राजस्व रिकॉर्ड को दुरुस्त कराया है। संबंधित भूमि को ग्राम समाज के नाम दर्ज किए जाने की कार्रवाई नियमानुसार की गई है। इतनी बड़ी भूमि से जुड़े मामले में एडीएम न्यायालय के आदेश के बाद तहसील प्रशासन की ओर से की गई यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अब राजस्व अभिलेखों में 106 एकड़ भूमि ग्राम समाज के नाम दर्ज होने के बाद आगे की कार्रवाई भी इसी रिकॉर्ड के आधार पर की जाएगी। तहसीलदार अमित कुमार के मुताबिक एडीएम कोर्ट का आदेश मिल चुका है। आदेश के बाद उक्त जमीन को ग्राम समाज में दर्ज कर लिया गया है।
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क्या है मामला
मामला शाहबाद क्षेत्र के गैरआबाद ग्राम मोहम्मदपुर उर्फ नया गांव से जुड़ा हुआ है। यहां पर मधुकर निवासी शिवराज सिंह उनके भाई बृजराज सिंह, अभिनंदन सिंह, हरिराज के साथ ही उनकी मां रामवती पर फर्जी कागजात के जरिये 106 एकड़ जमीन हड़पने की शिकायत की गई थी। ग्राम सभा की ओर से 2010 में सरकारी जमीन को निजी भूमि में दर्ज किए जाने का मामला उप संचालक (चकबंदी) कोर्ट में विचाराधीन था। कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि विवादित भूमि के पुराने राजस्व अभिलेखों में संबंधित गाटे रामगंगा नदी और रेत के रूप में दर्ज किया गया था। ऐसे में सरकारी और सार्वजनिक उपयोग की जमीन को निजी अधिकार में दर्ज कराने की प्रक्रिया पर ही गंभीर सवाल खड़े हो गए थे। मामला बढ़ने के बाद ग्राम सभा की भूमि प्रबंधक समिति के सचिव ने मामले को गंभीरता से लिया। शासकीय अधिवक्ता के माध्यम से अभिलेखागार से संबंधित पुरानी पत्रावलियां निकलवाकर उनकी जांच कराई गई। इसके बाद ग्राम सभा की ओर से 29 जुलाई 2025 को उप संचालक चकबंदी के कोर्ट में पुनर्स्थापना प्रार्थना पत्र दाखिल कर पुराने आदेश को चुनौती दी गई थी, जिस पर उप संचालक (चकबंदी) कोर्ट ने इस मामले में निजी लोगों के नाम हटाकर रिकॉर्ड में ग्राम समाज की जमीन दर्ज करने के आदेश दिए थे।
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कब क्या हुआ
10 दिसंबर 2004 को चकबंदी अधिकारी शाहबाद ने उसे रेत में दर्ज किया गया
06 मार्च 2010 को इसके खिलाफ चकबंदी अधिकारी कोर्ट ने आपत्तिकर्ताओं की निगरानी याचिका पर आदेश दिया।
07 जुलाई 2010 को इसके विरुद्ध दायर ग्राम सभा की अपील उप संचालक चकबंदी कोर्ट ने खारिज कर दी
07 सितंबर 2011 को हाईकोर्ट ने आपत्तिकर्ता के नाम को अमलदरामद करने के आदेश दिए
15 मार्च 2014 को आपत्तिकर्ता के नाम अमलदरामद कर दिया गया।
06 अक्तूबर 2025 को आपत्तिकर्ता की ओर से पुनर्स्थापना प्रार्थना पत्र पर आपत्ति प्रस्तुत की
28 अगस्त 2026 को उप संचालक चकबंदी कोर्ट ने निगरानीकर्ताओं के नाम निरस्त कर जमीन को ग्राम समाज में दर्ज करने के आदेश दिए।
106 एकड़ ग्राम सभा की जमीन पर मिले यूकेलिप्टस-पॉपुलर के पेड़, कई गांवों के ग्रामीण भी रहे हैं काबिज
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहबाद। गांव मोहम्मदनगर उर्फ नया गांव की 106 एकड़ यानी प्रति एकड़ सवा छह बीघा के मानक के हिसाब से 662.5 बीघा बेशकीमती जमीन को निजी नामों में दर्ज कराने के मामले में सामने आए तथ्यों ने राजस्व और चकबंदी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिसकी मौजूदा कीमत करीब 16 करोड़ रुपये आंकी जा रही है।
बुधवार को जमीन की पड़ताल की गई तो वहां बड़ी संख्या में यूकेलिप्टस और पॉपुलर के पेड़ खड़े मिले, जबकि कुछ हिस्सा खाली पड़ा हुआ था। जमीन का बड़ा भूभाग खादर क्षेत्र में होने के कारण मौके तक पहुंचना भी आसान नहीं है। चकरोड पर जगह-जगह जलभराव होने से रास्ता बेहद फिसलन भरा हो गया है। ग्रामीणों के मुताबिक बरसात के दिनों में यहां पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं है।
मौके पर मिले कई चरवाहों ने बताया कि इस जमीन पर लंबे समय से कूप, महेवा समेत आसपास के कई गांवों के सैकड़ों लोगों का भी कब्जा रहा है। ग्रामीण यहां धान और गेहूं की फसल भी करते रहे हैं। 106 एकड़ में फैली यह जमीन कूप, नवीगंज जदीद और भोपतपुर जंगल की सीमा से लगी हुई है।
रामगंगा के खादर क्षेत्र से जुड़ी होने के कारण जमीन का भूगोल भी ऐसा है कि बरसात के दिनों में यहां पहुंचना और मौके की स्थिति देखना मुश्किल हो जाता है। बावजूद इसके इतने बड़े भूभाग को निजी नामों में दर्ज कराने का मामला सामने आने से राजस्व अभिलेखों की निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं।