रामपुर। सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर पर हुए हमले के मामले में कोर्ट से 10 साल की सजा पाया फहीम अंसारी पहले ही रिहा हो चुका है। उसको कोर्ट ने 2019 में दोषी मानते हुए दस साल कैद व 95 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। फहीम निर्धारित अवधि से ज्यादा समय से जेल में बंद था। इसलिए जुर्माना राशि जमा होने के बाद फहीम को रिहा कर दिया गया था। उस पर इस बीच मुंबई हमले का भी आरोपी बनाया गया था, लेकिन वह इस केस में भी बरी कर दिया गया था।
मुंबई के गोरेगांव एएम रोड के मोतीनगर टू निवासी फहीम अंसारी को 10 फरवरी 2008 को एटीएस ने रामपुर से गिरफ्तार किया था। उसके पास से पाकिस्तान में बनी पिस्टल के साथ ही इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान हस्सन हम्माद नाम का पासपोर्ट भी बरामद हुआ था। इस आधार पर हमले के मुकदमे में उसका नाम शामिल किया गया। फहीम पर देशद्रोह का मुकदमा भी चला, हालांकि आरोप साबित नहीं हो पाया।
पाकिस्तानी पिस्टल और पासपोर्ट बरामद होने पर अदालत ने उसे 2019 में दस साल की सजा सुनाई थी। लेकिन वह दस साल से ज्यादा की सजा काट चुका था। इसलिए उसे 2019 में रिहा कर दिया गया था। फहीम अंसारी पर मुंबई हमले में भी रेकी के आरोप लगे थे लेकिन अदालत में आरोप सिद्ध न हो पाने के कारण उसे बरी कर दिया गया था। बरेली की सेंट्रल जेल में वह करीब 11 साल तक बंद रहा था।