रामपुर। मनरेगा के तहत श्रमिकों को रोजगार देने से लेकर मानव दिवसों के एवज में किए जाने वाले भुगतान तक में मिलक ब्लॉक जिले में सबसे निचले पायदान पर है। मिलक में 31 अक्तूबर तक लक्ष्य के सापेक्ष करीब 70 फीसदी मानव दिवसों का ही सृजन हो सका है तो भुगतान की स्थिति इससे भी खराब है।
मनरेगा की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़े जिले में गरीब श्रमिकों को रोजगार मुहैया कराने की मुहिम की हकीकत बयां कर रहे हैं। दो ब्लॉकों को छोड़कर अन्य किसी भी ब्लॉक में लक्ष्य के सापेक्ष कार्य नहीं किया गया है। इनमें मिलक और सैदनगर के हालात तो काफी खराब हैं। मनरेगा वेबसाइट पर 31 अक्तूबर तक के अपलोड भौतिक प्रगति के अनुसार मिलक में 69.63 फीसदी मानव दिवस ही लक्ष्य के सापेक्ष सृजित हो सके। वहीं भुगतान में हालात इससे भी बुरे हैं, मनरेगा श्रमिकों में 58.56 फीसदी का भुगतान लंबित है। मिलक की 129 ग्राम पंचायतों में से मात्र 76 ग्राम पंचायतों में ही मनरेगा के तहत कार्य कराया गया। शेष में किसी श्रमिक को रोजगार नहीं दिया गया, यानि गांवों में विकास कार्य ठप पड़े हैं, जो कि काफी गंभीर स्थिति है। मजदूरी के भुगतान की स्थिति भी खराब रही। जिले में मानव दिवस सृजन के मामले में 127.44 फीसद के साथ बिलासपुर पहले, 115.25 फीसद के साथ स्वार दूसरे, 91.47 फीसद के साथ चमरौआ तीसरे, 78.57 फीसद के साथ शाहबाद चौथे, 76.11 फीसद के साथ सैदनगर पांचवें और 69.63 प्रतिशत के साथ मिलक छठे और अंतिम नंबर पर है।