रामपुर। जिले में दहेज उत्पीड़न के मामलों में लगातार बढ़ोतरी गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। बीते 90 दिनों में ऐसे 84 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें कई विवाहिताओं को ससुराल से निकाल दिया गया। आंकड़ों के अनुसार जिले में लगभग प्रतिदिन एक मामला दर्ज हो रहा है।
दहेज उत्पीड़न के मामलों में पीड़ित महिलाओं को शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है। कई मामलों में अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर दबाव बनाया जाता है और विरोध करने पर उन्हें घर से निकाल दिया जाता है। सामाजिक भय और पारिवारिक दबाव के चलते कई महिलाएं शिकायत दर्ज नहीं करातीं, जिससे वास्तविक संख्या और अधिक होने की आशंका है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दहेज उत्पीड़न के मामलों में त्वरित कार्रवाई की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। साथ ही महिलाओं को जागरूक करने और उन्हें न्याय दिलाने के लिए अभियान भी चलाए जा रहे हैं। सामाजिक स्तर पर इस कुरीति के खिलाफ मिलकर आवाज उठाने की आवश्यकता बताई जा रही है।
पिछले वर्षों के आंकड़े
पुलिस के अनुसार वर्ष 2025 में दहेज उत्पीड़न के 595 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि 2024 में यह संख्या 441 रही। साल दर साल बढ़ते मामलों ने चिंता और बढ़ा दी है।
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महिला उत्पीड़न रोकने के लिए पुलिस गंभीर है। जो भी शिकायत होती है उसका जांच के बाद निस्तारण किया जाता है। जांच के बाद ही कार्रवाई होती है। -अनुराग सिंह, एएसपी