आजम खां के ड्रीम प्रोजेक्ट पर ब्रेक से शासन खफा
रामपुर। करोड़ों रुपये खर्च कर देने के बाद जेल का निर्माण यूं ही रोक डाला गया। अब जेल का निर्माण रुकने के बाद प्रमुख सचिव गृह मणिप्रसाद शर्मा ने अब अफसरों को ही आड़े हाथों लिया है। शासन ने पूछा है कि करोड़ों रुपये खर्च होेेने के बाद भी जेल का निर्माण किसके आदेश पर रोका गया है। शासन ने अफसरों से स्थिति साफ करते हुए जेल के निर्माण में बाधा बने 254 आवासों को खाली कराने के आदेश जारी किए हैं। इस आदेश के बाद सरकारी हलकों में खलबली मच गई है।
समाजवादी पार्टी सरकार में कद्दावर मंत्री आजम खां ने चीनी मिल की जमीन पर जेल का निर्माण कराने की स्वीकृति कराई थी,जिसके बाद चीनी मिल की जमीन को कारागार विभाग को आवंटित भी कर दिया गया था। 1.66 अरब की लागत से तैयार होने वाली जेल के निर्माण पर ही 12 करोड़ रुपये खर्च भी किए जा चुके हैं,लेकिन सरकार बदलते ही जेल के निर्माण पर संकट के बादल मंडराने लगे थे। जेल के निर्माण में ढाई सौ से ज्यादा आवास बाधा बने हुए थे,जिनके मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं। निर्माण कार्य में अड़ंगे की खास वजह यह भी बताई गई है। इस मुद्दे को प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख ने भी जेल के निर्माण पर रोक लगाने की मांग शासन के समक्ष रखी,जिसके बाद शासन ने कारागार विभआग से रिपोर्ट तलब की थी। इसके बाद एडीजी जेल के रामपुर आगमन के बाद से ही रामपुर में जेल का निर्माण रोक दिया गया था। दो माह बाद अब आखिरकार जेल का निर्माण रोके जाने के मामले को शासन ने गंभीरता से लिया है। प्रमुख सचिव गृह मणि प्रसाद शर्मा के साथ ही राज्य चीनी निगम के एमडी ने प्रशासन व चीनी मिल प्रशासन से अब यह पूछा है कि आखिर रामपुर चीनी मिल की जमीन पर बन रही जेल का निर्माण किसके आदेश पर रोका गया है। आदेश यह भी दिया गया है कि अफसर इसकी स्थिति स्पष्ट करें। इसके साथ ही शासन ने यहां जेल के निर्माण में बाधा बने 254 आवासों को सप्ताह भर के भीतर खाली कराए जाएं और इसकी रिपोर्ट भी दी जाए। इस आदेश के बाद खलबली मच गई है। फिलहाल प्रशासन ने चीनी मिल प्रशासन से इस पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की है।