यदि 15 साल से अधिक पुराने ट्रकों और बसों को चलाने पर रोक लगाने की योजना अमल होता है तो रामपुर के लगभग 750 से अधिक वाहन इसकी जद में आएंगे। रामपुर में रजिस्ट्रर्ड ट्रकों की संख्या लगभग 600 और बसों की संख्या लगभग 150 है।
परिवहन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक रामपुर में चलने वाले पुराने की वाहनों की संख्या अधिक भी हो सकती है, क्योंकि ये आंकड़े रामपुर एआरटीओ कार्यालय में रजिस्ट्रर्ड वाहनों की है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शासनादेश आने के बाद इस पर कड़ाई से अमल किया जाएगा।
गौरतलब है कि सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय 15 साल से अधिक पुराने ट्रक और बसों के चलने पर रोक लगाने को लेकर विचार-विमर्श शुरू किया है। केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की ओर से प्रस्ताव के परिणाम की समीक्षा के बाद अंतिम निर्णय किए जाने की संभावना है।
सुरक्षा एवं पर्यावरण प्रदूषण को लेकर बढ़ती चिंता के मद्देनजर सभी प्रकार के वाणिज्यिक वाहनों पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है, चाहे उनके पास राष्ट्रीय परमिट हो या नहीं हो। हालांकि इसको लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं लिया गया है, लेकिन इसको लेकर ट्रांसपोर्टरों में हलचल मचनी शुरू हो गई है।
ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि अगर ये फैसला लागू हो गया तो सड़क पर चलने वाले ट्रकों और बसों की संख्या कम हो जाएगी। ऐसे में माल भाड़ा भी बढ़ सकता है। इसकी जद में स्कूलों में चलने वाले बसें भी आएंगी। रामपुर के अधिकांश स्कूलों में पुरानी बसें चल रही हैं, जो दिल्ली और अन्य शहरों में रजिस्टर्ड है।
एआरटीओ (प्रवर्तन) कौशलेंद्र प्रताप यादव ने बताया कि अभी इस संबंध में कोई शासनादेश नहीं आया है। शासनादेश आने पर कड़ाई से पालन किया जाएगा। उत्तर प्रदेश युवा उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के प्रदेश उपाध्यक्ष संदीप अग्रवाल सोनी ने प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर कहा कि 15 साल से अधिक पुराने वाहनों पर प्रतिबंध लगाए जाने से आम आदमी पर विपरीत असर पड़ेगा।
इससे ट्रांसपोर्टरों की आर्थिक स्थिति प्रभावित होगी। माल भाड़ा 40 फीसदी तक बढ़ जाएगा। अगर प्रदूषण को रोकना है कि इसके लिए वाहनों के फिटनेस की जांच होनी चाहिए। व्यापारियों के हित को ध्यान में रखते हुए इस फैसले पर अमल न किया जाए।