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अदाकारी की यूनिवर्सिटी थे कादर खान : रजा मुराद

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रामपुर। नववर्ष के पहले ही दिन यह समाचार मिला कि कादर खान नहीं रहे। कादर खान का जाना बालीवुड के लिए भारी नुकसान है। कादर खान सिर्फ एक अदाकार और संवाद लेखक नहीं थे, वह अपने आप में अदाकारी की यूनिवर्सिटी थे। कादर के नहीं रहने से एक युग का अंत हो गया।
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कादर खान के साथ मैंने 30-40 फिल्मों में काम किया होगा। उनके जैसा प्रतिभाशाली कलाकार मैंने अपनी जिंदगी में नहीं देखा। जो भूमिका उनको सौंपी गई उसमें वह पूरी तरह से डूब गए। चाहे वह खलनायक की भूमिका हो, हास्य कलाकार की भूमिका हो या चरित्र अभिनेत्रा। खलनायक के बाद हास्य कलाकार की भूमिका अदा करना हर किसी के बूते की बात नहीं है। कादर ने हास्य कलाकार के रूप में भी अपनी पहचान बनाई। अमिताभ बच्चन की लोकप्रियता में कादर खान का अहम योगदान है। कादर खान ने अमिताभ बच्चन की कई फिल्मों के डायलॉग लिखे हैं और लिखे हुए डायलॉग काफी चर्चित भी रहे। कादर खान एक ऐसे चरित्र अभिनेता थे, जिनके नाम पर फिल्म चलती थी। अच्छे-अच्छे प्रोड्यूशर्स उनकी सेट पर लाइन में खड़े रहते थे। कादर खान को जो भी भूमिका मिली उससे उन्होंने जनता का मनोरंजन किया। जहां तक मेरी जानकारी है बालीवुड में कादर ने जितनी फिल्मों में डबल और ट्रिपल रोल किया, उतना किसी ने नहीं किया। कादर खान ने बालीवुड के साथ-साथ दक्षिण भारत की फिल्मों में राज किया। वह न सिर्फ बुलंदी पर पहुंचे बल्कि कई दशकों तक बुलंदी पर ठहरे रहे। बुलंदी पर पहुंचना बड़ी बात नहीं है, लेकिन बुलंदी को बरकरार रखना बड़ी बात है। कादर खान एक ऐसे कलाकार हैं जिन्होंने बुुलंदी को कई दशकों तक बरकरार रखा। कमाल के एक्टर थे, कादर खान। भारतीय सिने जगत को उनकी कमी हमेशा अखरेगी। उनके नहीं रहने की कमी हमेशा महसूस रहेगी।
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