मोटी फीस वाले स्कूलों में खटारा बसों में सफर कर रहे छात्र
रामपुर।
अभिभावकों से मोटी फीस वसूलने वाले सीबीएसई स्कूलों में पुरानी खटारा बसों में बच्चों को स्कूल ले जाया जा रहा है। स्कूलों में ट्रांसपोर्टरों से अनुबंध कर बसें लगा ली गई हैं। हादसा होने पर जिम्मेदारी का ठीकरा ट्रांसपोर्टर पर फोड़ दिया जाता है। ट्रांसपोर्टर भी नया स्कूल वाहन खरीदने के बजाए पुरानी सस्ती बसों को खरीदकर स्कूलों में लगा देते हैं। जो बसें अन्य प्रदेशों व बड़े शहरों के स्कूल व संस्थानों में रिजेक्ट कर दी जाती हैं। उनमें छात्रों को स्कूल ले जाने का काम किया जा रहा है।
स्कूल बसों में भी बच्चे सुरक्षित नहीं है। चंद रुपयों के लालच में पुरानी बसों को स्कूल वाहन के रूप में प्रयोग किया जा रहा है। हालांकि इनकी हर साल आरटीओ से फिटनेस ली जाती है, लेकिन, सवाल उठता है कि जब सुविधाओं के नाम पर अभिभावकों से मोटी फीस वसूली जा रही है तो फिर बच्चों को पुरानी बसों में क्यों ले जाया जा रहा है? जिले के सीबीएसई स्कूलों में रामपुर नंबर की स्कूल बस नाममात्र को दिखाई देंगी। यहां पर उत्तराखंड, नोएडा, दिल्ली, गाजियाबाद, बरेली आदि बड़े शहरों व अन्य प्रदेशों की पुरानी बसों को स्कूल बस के रूप में प्रयोग किया जा रहा है। इन बसों को कम दामों में खरीदकर एनओसी लेकर संचालित किया जाता है।